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First Stage of Cancer: मध्य प्रदेश में कैंसर का रूप तेजी से बदल रहा है. भोपाल में ओरल कैंसर, ग्वालियर में गॉल ब्लैडर कैंसर और इंदौर में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं. हर साल हजारों नए मरीज दर्ज हो रहे हैं. वहीं एम्स भोपाल में अब तक 40 हजार से ज्यादा कैंसर मरीजों का इलाज किया जा चुका है. इन आंकड़ों और कैंसर के बदलते पैटर्न ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
मध्य प्रदेश में कैंसर के मरीज (फाइल फोटो)
Bhopal News: एमपी में कैंसर का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. राज्य में अलग-अलग क्षेत्रों में कैंसर के प्रकार भी भिन्न नजर आ रहे हैं. भोपाल में ओरल कैंसर के मरीज सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं, जबकि ग्वालियर क्षेत्र में गॉल ब्लैडर कैंसर और इंदौर में ब्रेस्ट कैंसर के मामले अधिक दर्ज किए जा रहे हैं.
प्रदेश में कैंसर के इलाज के लिए समर्पित सरकारी अस्पतालों की संख्या सीमित है, लेकिन इसके बावजूद एम्स भोपाल जैसे संस्थानों में बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, एम्स भोपाल में अब तक 40 हजार से अधिक कैंसर मरीजों का उपचार किया जा चुका है.
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में हर साल हजारों नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं. ग्वालियर क्षेत्र में सालाना लगभग 4,200 नए कैंसर मरीज सामने आते हैं. इंदौर में यह संख्या करीब 5,000 है. भोपाल में हर साल लगभग 6,500 नए कैंसर मामलों की पहचान हो रही है. इलाज कराने वाले मरीजों के जिलेवार आंकड़े भी कैंसर के बढ़ते बोझ को दिखाते हैं.
एम्स भोपाल में इलाजरत अलग अलग जिलों के मरीज
भोपाल से 24,778 मरीज
रायसेन से 2,716
विदिशा से 1,830
सागर से 1,799
छतरपुर से 1,732
क्यों अलग-अलग शहरों में अलग कैंसर?
विशेषज्ञों के अनुसार, भोपाल में ओरल कैंसर के अधिक मामलों के पीछे तंबाकू, गुटखा और धूम्रपान मुख्य कारण हैं. ग्वालियर-चंबल अंचल में गॉल ब्लैडर कैंसर के मामलों को खान-पान की आदतों और लंबे समय से चली आ रही पाचन संबंधी समस्याओं से जोड़कर देखा जा रहा है. वहीं इंदौर में ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे जीवनशैली में बदलाव, देर से जांच और जागरूकता की कमी बड़ी वजह मानी जा रही है. भोपाल में ओरल कैंसर के करीब 5 हजार केस, ग्वालियर में गॉल ब्लैडर कैंसर के 4 हजार से अधिक, इंदौर में ब्रेस्ट केंसर के करीब 6500 मामले सलाना सामने आए हैं. भोपाल सीएमएचओ डॉ मनीष शर्मा ने कहा कि कैंसर के बदलते पैटर्न के मद्देनजर हम अलर्ट हैं, संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर स्क्रीनिंग कराई जा रही है.
समय पर जांच जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि अगर शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दिया जाए और समय रहते जांच कराई जाए, तो कैंसर के इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है. तंबाकू और शराब से दूरी, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच से इस गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें
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