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Surendra Sharma Success Story: बुरहानपुर के सुरेंद्र शर्मा ने माता-पिता की मौत के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी बनकर मिसाल पेश की. उनकी बुआ और परिवार के सहयोग से उन्होंने कठिन परिस्थितियों में खेल को अपना लक्ष्य बनाया. आज वे बुरहानपुर फुटबॉल क्लब और स्पोर्ट फाउंडेशन के माध्यम से 21 राष्ट्रीय और 80 से अधिक राज्य स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार कर चुके हैं. सुरेंद्र के पास AIFF D लाइसेंस कोचिंग सर्टिफिकेट है और वे खुद भी राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं. उनका सपना है कि गांव और मध्यम वर्ग के बच्चे भी देश के लिए खेलें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएं.
Burhanpur News: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर के सुरेंद्र शर्मा की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. डेढ़ साल की उम्र में माता-पिता का साया सिर से उठ गया. ऐसे में उनकी बुआ मनोरमा शर्मा और फूफा ने उन्हें संभाला, पाला-पोसा और हर कदम पर साथ दिया. आर्थिक हालात आसान नहीं थे, लेकिन सपनों पर ताला नहीं लगा.
बचपन से खेल का जुनून
सुरेंद्र बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें खेल से गहरा लगाव था. स्थानीय मैदान पर घंटों प्रैक्टिस करते थे. स्कूल के दिनों में दौड़, फुटबॉल और एथलेटिक्स में सक्रिय रहे. जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और धीरे-धीरे नेशनल लेवल तक पहुंच गए. परिवार के सहयोग ने उनके सपनों को उड़ान दी.
खुद बने नेशनल खिलाड़ी, अब बना रहे चैंपियन
आज सुरेंद्र खुद फुटबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं. लेकिन उनकी असली पहचान सिर्फ खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि एक कोच और मार्गदर्शक के रूप में बनी है. उन्होंने गांव और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया.
21 नेशनल और 80 से ज्यादा स्टेट खिलाड़ी तैयार
सुरेंद्र ने बुरहानपुर फुटबॉल क्लब और बुरहानपुर स्पोर्ट फाउंडेशन की स्थापना की. यहां गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को कम शुल्क या मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाता है. अब तक वे 21 से ज्यादा राष्ट्रीय स्तर के और 80 से अधिक राज्य स्तर के खिलाड़ियों को तैयार कर चुके हैं. फुटबॉल के साथ एथलेटिक्स, शतरंज और टेबल टेनिस में भी बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं.
लाइसेंसधारी कोच और चैंपियन धावक
सुरेंद्र के पास AIFF ‘D’ लाइसेंस कोचिंग सर्टिफिकेट है. वे जिला स्तर पर 100 मीटर दौड़ और लंबी कूद में चैंपियन भी रह चुके हैं. फर्स्ट एड और फिटनेस ट्रेनिंग का भी प्रमाणन उनके पास है. उनका सपना है कि उनके गांव और जिले का कोई खिलाड़ी देश के लिए खेले.
अब लक्ष्य देश के लिए खेलना
सुरेंद्र कहते हैं कि उन्होंने संघर्ष देखा है, इसलिए चाहते हैं कि गांव के बच्चों को अवसर मिले. वे आज भी रोज प्रैक्टिस करते हैं और बच्चों को बेहतर सुविधाएं दिलाने की कोशिश में जुटे हैं. उनका अगला लक्ष्य है अपने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें