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Bundelkhand Medical College News: एक दुर्लभ बीमारी Congenital varicella syndrom वाला नवजात बच्चा इलाज के लिए पहुंचा था. उसकी नब्ज धीमी चल रही थी. सांस लेने में परेशानी हो रही थी और इस बीमारी की मृत्यु दर 50% है. हालांकि डॉक्टरों ने बचा लिया. जानें पूरा मामला…
Sagar News: सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में दुर्लभ बीमारी Congenital Varicella Syndrom का केस आया. एक नवजात जिसकी नब्ज धीमी चल रही थी. सांस लेने में परेशानी हो रही थी. इस बीमारी की मृत्यु दर 50% है. डॉक्टरों ने पहले बच्चे को भोपाल भेजने की सोची, लेकिन उसकी हालत को देखते मेडिकल कॉलेज में ही इलाज करने का निर्णय लिया. बताया गया कि इस बीमारी का इलाज करने डॉक्टरों को भी संक्रमित होने का खतरा रहता है. लेकिन, खुद की चिंता किए बगैर बच्चे का इलाज शुरू किया गया.
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के सह प्राध्यापक और चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. अजीत असाटी बताते हैं कि हमारे पास करीब 12 दिन पहले एक बच्चा आया था. बच्चे की स्थिति काफी खराब थी. सांस भी नहीं ले पा रहा था. नब्ज धीमी चल रही थी. पूरे शरीर में चकत्ते थे, सूजन थी. इसको चिकन पॉक्स Congenital Varicella Syndrome बोलते हैं. इसकी वजह से शरीर के काफी ज्यादा अंग प्रभावित होते हैं. इसमें सांस लेने में परेशानी, हृदय गति ऊपर नीचे होना, नब्ज धीरे चलती है. ऐसी स्थिति में बच्चा हमारे पास आया था. यह बीमारी फैलने का खतरा भी होता है.
भोपाल भेजने के लिए समय कम था
डाॅक्टर ने बताया, हमारे पास दो विकल्प थे. पहला हम लोग ही इलाज करके ठीक करें या फिर भोपाल रेफर करें. भोपाल भेजने के हिसाब से बच्चों के पास समय बहुत कम था. तब यहीं इलाज का निर्णय लिया गया. हमने मेडिकल कॉलेज के बच्चों वाले आईसीयू सेंटर में भर्ती किया. उसको वेंटिलेटर पर रखा. 6 दिन तक बच्चा वेंटिलेटर पर रहा. इसके बाद उसने धीरे-धीरे रिकवर किया. इससे हमारा भी हौसला बढ़ा. अब 14 दिन बाद बच्चा स्वास्थ्य और सुरक्षित कर डिस्चार्ज कर दिया गया है.
मां से लगी बीमारी
डॉ. अजीत के अनुसार, इस बच्चे को यह बीमारी मां के द्वारा ही लगी थी. मां को डिलीवरी के तीसरे दिन से ही चिकन पॉक्स हुआ था. उससे बच्चा संक्रमित हुआ था. यह बच्चा हमारे पास 18 दिन पर आया था, जिसकी स्थिति काफी नाजुक थी.
बच्चे को मौत के मुंह से वापिस लाए
HOD डॉ. आशीष जैन के नेतृत्व में हम लोगों ने इलाज स्टार्ट किया. 6 दिन तक बच्चा वेंटिलेटर पर रहा. स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ. कुछ महंगी दवाओं की भी जरूरत थी, लेकिन वह भी मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध थी. इसकी वजह से ज्यादा परेशानी नहीं हुई. 6 दिन बाद वेंटीलेटर से उसको निकाल फिर 14 दिन तक मेडिकल कॉलेज में इलाज चला. जब वह पूरी तरह से सुरक्षित हुआ तब डिस्चार्ज कर दिया गया है.
एक लाख में एक बच्चे को होती है ये बीमारी
बताया गया कि यह बीमारी काफी दुर्लभ है. चिकन पॉक्स बड़ा है, लेकिन Congenital Varicella Syndrome मतलब मां से बच्चे को जन्म से 2 दिन पहले से या डिलेवरी के 5 दिन बाद तक अगर बच्चा मां से इनफैक्ट होता है तो बच्चे में लक्षण आते हैं. नवजात स्थिति में बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है. ऐसे में स्थिति एकदम से बिगड़ जाती है. एक लाख में एकआध बच्चों को ऐसा होता है. इस बीमारी की मृत्यु दर भी 50% है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें