Mahakal Bhasm Arti Timing: साल में सिर्फ एक बार दोपहर 12 बजे होती है महाकाल की भस्म आरती! जानें महत्व

Mahakal Bhasm Arti Timing: साल में सिर्फ एक बार दोपहर 12 बजे होती है महाकाल की भस्म आरती! जानें महत्व


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Ujjain Mahakal Bhasm Arti Timing: उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में साल में केवल एक बार दोपहर 12 बजे विशेष भस्म आरती आयोजित की जाती है, जो शिव नवरात्रि के समापन पर संपन्न होती है. इस दिन बाबा महाकाल का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से भव्य अभिषेक कर विशेष श्रृंगार किया जाता है. मान्यता है कि दोपहर की इस भस्म आरती के दर्शन से श्रद्धालु वर्षभर के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं. महाशिवरात्रि के अवसर पर लाखों भक्त उज्जैन पहुंचते हैं और मंदिर के पट लगभग 44 घंटे तक खुले रहते हैं. महाकाल की यह दुर्लभ परंपरा आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम मानी जाती है.

Mahakal Afternoon Bhasm Arti: मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां हर पर्व भव्य रूप में मनाया जाता है, लेकिन महाशिवरात्रि का उत्सव कुछ अलग ही होता है. देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं. सबसे खास आकर्षण रहती है महाकाल की भस्म आरती.

रोज सुबह 4 बजे… लेकिन एक दिन दोपहर 12 बजे
मंदिर के पुजारी महेश के अनुसार, बाबा महाकाल की भस्म आरती प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त यानी सुबह 4 बजे होती है. लेकिन साल में सिर्फ एक दिन ऐसा आता है, जब यह आरती दोपहर 12 बजे संपन्न होती है. यह विशेष अवसर शिव नवरात्रि के समापन का होता है. नौ दिन का कठोर व्रत रखने वाले 11 ब्राह्मण इसी दिन अपने अनुष्ठान का समापन करते हैं और उसी के साथ शिव नवरात्रि का विधिवत पारणा होता है.

ऐसे शुरू होता है दिव्य अभिषेक
इस दिन बाबा महाकाल का भव्य अभिषेक किया जाता है. दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और फलों के रस से भगवान का स्नान कराया जाता है. इसके बाद पवित्र भांग अर्पित कर विशेष श्रृंगार किया जाता है. बाबा को पारंपरिक पगड़ी और सेहरा धारण कराया जाता है. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोपहर की भस्म आरती का अद्भुत दृश्य भक्तों को भाव-विभोर कर देता है.

दोपहर की भस्म आरती का विशेष महत्व
मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरे साल सुबह 4 बजे की भस्म आरती के दर्शन नहीं कर पाते, वे इस दोपहर की आरती के दर्शन कर सालभर का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं. यही वजह है कि इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं.

44 घंटे तक खुले रहेंगे पट
महाशिवरात्रि के अगले दिन बाबा महाकाल को सेहरा सजाकर दूल्हा स्वरूप में दर्शन दिए जाएंगे. सेहरा दर्शन के बाद दोपहर 12 बजे विशेष भस्म आरती होगी. इसके बाद भोग आरती, सायं पूजन, श्रृंगार, सायं आरती और शयन आरती संपन्न होगी. इस दौरान भगवान महाकाल के पट लगभग 44 घंटे तक खुले रहेंगे, जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर सकें.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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