किसानों के लिए जैकपॉट ‘लौकी’, सिर्फ 40 दिन में बना देगी लखपति

किसानों के लिए जैकपॉट ‘लौकी’, सिर्फ 40 दिन में बना देगी लखपति


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Agriculture News: गोल लौकी की खेती किसानों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है क्योंकि यह बुवाई के 40 से 45 दिन में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. जल्दी तैयार होने के चलते किसान कम समय में बाजार में फसल पहुंचाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

सीधी. मध्य प्रदेश में फरवरी का महीना लौकी की खेती के लिए खास माना जाता है. किसान अक्सर लंबी और गोल लौकी के बीच उलझन में रहते हैं लेकिन गोल लौकी 40-45 दिन में तैयार होकर जल्दी मुनाफा दे देती है. संतुलित तापमान और धूप से इसकी बढ़वार अच्छी होती है. बाजार में लगातार मांग रहने से किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं और कम लागत में अच्छी कमाई संभव है. सीधी के कृषि विशेषज्ञ अवनीश पटेल ने लोकल 18 से कहा कि गोल लौकी लोगों की पसंदीदा सब्जियों में शामिल हो गई है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषक तत्वों से भरपूर भी होती है. सीमित संसाधनों में भी इसकी अच्छी उपज ली जा सकती है. यही वजह है कि गांवों के साथ-साथ शहरों में भी लोग इसे अपने घर के आंगन, छत या खेत की मेड़ पर लगाने लगे हैं.

उन्होंने कहा कि गोल लौकी की खेती विशेष रूप से फायदेमंद मानी जा रही है क्योंकि यह बुवाई के 40 से 45 दिन में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. जल्दी तैयार होने के कारण किसान कम समय में बाजार में फसल पहुंचाकर अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं.

स्वस्थ पौध तैयार करना जरूरी
अवनीश पटेल के अनुसार, अच्छी पैदावार के लिए पहले स्वस्थ पौध तैयार करना जरूरी है. यदि पौध तैयार करना संभव न हो, तो बीज सीधे खेत में भी बोए जा सकते हैं. नियमित सिंचाई, संतुलित खाद और बेल को सहारा देने से उत्पादन में बढ़ोतरी होती है. कुल मिलाकर लगभग 20 हजार रुपये तक की लागत में एक एकड़ में अच्छी खेती की जा सकती है.

अच्छी पैदावार के लिए टिप्स
गोल लौकी की अच्छी पैदावार के लिए खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी भुरभुरी बना लें. गोबर की सड़ी खाद मिलाएं. जल निकास की सही व्यवस्था रखें क्योंकि पानी भराव से फसल खराब हो सकती है. इसके बाद क्यारियां या मेड़ बनाकर 2–3 फीट की दूरी पर बीज बोएं. नियमित सिंचाई और निराई-गुड़ाई जरूरी है.

गोल लौकी का बढ़ा चलन
विंध्य क्षेत्र में इन दिनों तुमा या गोल लौकी का चलन बढ़ रहा है. डॉक्टर सीड्स कंपनी की गोल लौकी किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह किस्म मात्र 40 से 45 दिन में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. गोल आकार और चमकदार रंग के कारण बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है. बेहतर देखभाल से इसकी पैदावार भी अधिक होती है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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