ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला: कहा-फ्री सवारियां कवर न हों तब भी बीमा कंपनी पहले देगी मुआवजा, बाद में मालिक से करेगी वसूली – Gwalior News

ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला:  कहा-फ्री सवारियां कवर न हों तब भी बीमा कंपनी पहले देगी मुआवजा, बाद में मालिक से करेगी वसूली – Gwalior News




ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मोटर दुर्घटना मामलों में पीड़ितों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि वाहन बीमा पॉलिसी में मुफ्त सवारियों का जोखिम कवर नहीं है, तब भी बीमा कंपनी को पहले मुआवजा देना होगा और बाद में वाहन मालिक से राशि वसूलने का अधिकार रहेगा। न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया ने 5 फरवरी 2026 को पारित आदेश में चौथे मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण मुरैना द्वारा 11 अगस्त 2008 को दिए गए अवार्ड को बरकरार रखा और बीमा कंपनी की सभी सिविल रिवीजन व विविध अपीलें खारिज कर दीं। ‘पे एंड रिकवर’ सिद्धांत लागू अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी केवल इस आधार पर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि पॉलिसी में यात्रियों का जोखिम कवर नहीं था। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलना सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे मामलों में ‘पे एंड रिकवर’ सिद्धांत लागू होगा, जिसके तहत बीमा कंपनी पहले मुआवजा अदा करेगी और बाद में वाहन मालिक से वसूली करेगी। 2007 की दुर्घटना से जुड़ा मामला यह मामला 9 अप्रैल 2007 का है। ट्रैक्टर-ट्रॉली क्रमांक MP06 ZA 4684 से कुछ लोग निरार माता मेले में जा रहे थे। बनमोर घाटी के पास कच्चे रास्ते पर चालक की लापरवाही से वाहन पलट गया। दुर्घटना में मुन्नी देवी और रामकली की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। मृतकों के परिजनों और घायलों ने अलग-अलग दावा प्रकरण दायर किए थे। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने मुआवजा मंजूर करते हुए बीमा कंपनी पर ‘पे एंड रिकवर’ सिद्धांत लागू किया था। बीमा कंपनी की दलील खारिज नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने तर्क दिया था कि सभी यात्री मुफ्त यात्रा कर रहे थे और उनके लिए प्रीमियम नहीं दिया गया था, इसलिए कंपनी मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए अधिकरण के आदेश को बरकरार रखा।



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