कटनी. मध्यप्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई और जल आपूर्ति योजनाओं में शामिल बरगी व्यपवर्तन परियोजना अपने अंतिम चरण में है. इसके पूरे होते ही नर्मदा नदी का पानी प्रदेश के जबलपुर से होकर कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिलों तक पहुंचने लगेगा. इस पूरे प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद कर रहे हैं, उम्मीद लगाई जा रही है 2026 में कटनी बल्कि 5 जिलों के लिए नर्मदा के पावन जल की सौगात लेकर आएगा. दरअसल, कटनी जिला मुख्यालय से करीब 35किमी दूर बसा स्लिमानाबाद जिसके 80 से 100फीट नीचे बरगी व्यपवर्तन नर्मदा घाटी परियोजना के तहत टनल निर्माण का कार्य जारी है. बरगी व्यपवर्तन परियोजना की शुरुआत साल 2008 में की गई थी. इसका उद्देश्य नर्मदा नदी के बरगी बांध से पानी को नहरों और टनल सिस्टम के माध्यम से सूखा प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना था. इस परियोजना को साल 2013 तक पूरा किया जाना था, लेकिन तकनीकी अड़चनें, भूस्खलन, बार-बार बने सिंक होल, स्थानीय आबादी का विस्थापन और लगातार बढ़ती लागत के कारण यह अपने लक्ष्य से करीब 13 साल पीछे चल रही है.
अफसरों ने बताया कि शुरुआत में इस परियोजना की अनुमानित लागत 799 करोड़ रुपये तय की गई थी. समय के साथ लागत बढ़ती चली गई और इसे संशोधित कर करीब 1100 करोड़ रुपये कर दिया गया. इसके बावजूद परियोजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है, जिस पर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं. पिछले 13 सालों से अधूरी पड़ी परियोजना जिसके लंबे इंतजार, बढ़ती लागत और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद अब सरकार और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारी का दावा हैं कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो साल 2026 में किसानों और आमजन को नर्मदा जल की सौगात मिल सकती है. बरगी व्यपवर्तन परियोजना का कार्य पटेल इंजीनियरिंग कंपनी को सौंपा गया था. योजना के तहत बरगी बांध से नर्मदा का पानी करीब 197 किलोमीटर लंबी प्रणाली के जरिए इन जिलों तक पहुंचाया जाना है. परियोजना में नहर, पाइपलाइन और सबसे जटिल हिस्सा तो अंडरग्राउंड टनल सिस्टम शामिल है. बात वर्तमान स्थिति की करें तो परियोजना का करीब 98 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है लेकिन अब भी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है.
बस कुछ थोड़ा सा ही काम बाकी, जल्द शुरू होगी टनल
कटनी जिले के स्लिमनाबाद में बन रही 11.95 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड टनल. अप लाइन की TBM मशीन के इंचार्अज अंबुज ओझा के मुताबिक, टनल के अप-स्ट्रीम हिस्से का 5.9 किमी और डाउन-स्ट्रीम का 5.5 किमी कार्य पूरा किया जा चुका है. अब महज लगभग 400 मीटर टनल की खुदाई शेष है. विभाग का दावा है कि यदि कोई नई तकनीकी परेशानी सामने नहीं आई, तो अप्रैल 2026 तक टनल की खुदाई पूरी कर ली जाएगी. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के तहत 1432.77 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति से जिले में बहोरीबंद उद्वहन माइक्रो सिंचाई योजना का कार्य प्रगति पर है. इस सिंचाई परियोजना से कटनी जिले के 167 गांवों की 44 हजार 333 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी. इसमें जिले के कटनी तहसील के 2 गांव के 613 हेक्टेयर, बहोरीबंद के 95 गांव के 22 हजार 103 हेक्टेयर, रीठी के 22 गांव के 6 हजार 314 हेक्टेयर तथा स्लीमनाबाद के 48 गांव के 15 हजार 303 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी. जिले में 799 करोड़ रुपये की राशि से बरगी व्यपवर्तन परियोजना की स्लीमनाबाद टनल का निर्माण कार्य कराया जा रहा है. टनल के पश्चात 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी. 563 मीटर शेष टनल का कार्य स्लीमनाबाद नगर के आवासीय एवं व्यवसायी क्षेत्र, एन.एच.-7 हाईवे एवं स्लीमनाबाद तालाब के नीचे से किया जाना है.
समय अवधि 8 बार बढ़ाते हुए 2026 तक ले जाई गई
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री ईई सहज श्रीवास्तव के अनुसार, इस टनल निर्माण के दौरान बीते एक दशक में कई गंभीर और अभूतपूर्व घटनाएं सामने आईं. स्लिमनाबाद क्षेत्र में कार्य के दौरान नेशनल हाईवे-30 पर करीब 20 फीट चौड़ा और 100 फीट गहरा सिंक होल बन गया, जिससे न केवल यातायात प्रभावित हुआ बल्कि सुरक्षा के लिहाज से परियोजना को लंबे समय तक रोकना पड़ा. आपको बता दे नर्मदा टनल का कार्य 2013 में ही पूरा हो जाना था लेकिन इसकी समय अवधि 8 बार बढ़ाते हुए 2026 तक ले जाई गई है. कार्यपालन यंत्री की माने तो टनल खुदाई के दौरान अब तक करीब 300 से ज्यादा बार सिंक होल बनने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. इन हादसों का सीधा असर स्थानीय आबादी पर भी पड़ा. करीब 80 से अधिक परिवारों को विस्थापित करना पड़ा. प्रभावित परिवारों को शासन की ओर से भोजन के लिए प्रति सदस्य 300 रुपये प्रतिदिन और किराए के मकान के लिए 4000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी गई. सुरक्षा जांच, भू-गर्भीय अध्ययन और तकनीकी सुधारों के चलते टनल का काम कई बार रोका गया, जिससे परियोजना की समय-सीमा लगातार आगे बढ़ती चली गई.
सूखा प्रभावित इलाकों में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी
इस पूरी परियोजना के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक समिति गठित कर रखी है जिसके तहत सांसद गणेश सिंह अनेकों बार इस टनल का भ्रमण कर चुके हैं. कटनी कलेक्टर अभिषेक तिवारी ने बताया कि नर्मदा टनल अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. टनल पूरा होते ही बरगी व्यपवर्तन परियोजना को चालू किया जा सकेगा. परियोजना के पूरा होने के बाद इसके दूरगामी और ऐतिहासिक लाभ सामने आएंगे. आंकड़ों के अनुसार, कटनी जिले में 21,823 हेक्टेयर, मैहर और सतना जिलों में 1,59,655 हेक्टेयर, जबलपुर में लगभग 60,000 हेक्टेयर और रीवा जिले में 3,532 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी. इससे हजारों किसानों को सिंचाई का स्थायी साधन मिलेगा और सूखा प्रभावित इलाकों में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. यह परियोजना सिर्फ खेती ही नहीं, बल्कि लोगों को पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे शहरी और ग्रामीण इलाकों के लिए भी राहत लेकर आएगी. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस परियोजना को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं और उन्होंने इसे शीघ्र पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं. कुल मिलाकर, वर्षों से इंतजार कर रहे किसानों और आम लोगों के लिए बरगी व्यपवर्तन परियोजना एक बार फिर उम्मीद की किरण बनकर उभरी है. अब सबकी निगाहें साल 2026 पर टिकी हैं, जब नर्मदा जल का यह अधूरा सपना आखिरकार हकीकत में बदलने की संभावना है.