एमपी में नदी किनारे अतिक्रमण पर सख्त NGT, रिपोर्ट मांगी: अशोक नगर के तुलसी सरोवर के सीमांकन के आदेश; 3 मामलों में सुनवाई – Bhopal News

एमपी में नदी किनारे अतिक्रमण पर सख्त NGT, रिपोर्ट मांगी:  अशोक नगर के तुलसी सरोवर के सीमांकन के आदेश; 3 मामलों में सुनवाई – Bhopal News




नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) ने 3 मामलों में सुनवाई करते हुए संबंधित को आदेश जारी किए हैं। एमपी में नदी किनारे अतिक्रमण पर सख्ती जताई है। वहीं, अशोकनगर के तुलसी सरोवर के सीमांकन के निर्देश दिए हैं। रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में अवैध ईंट भट्टों के खिलाफ भी कार्रवाई को कहा है। एनजीटी की भोपाल बैंच के न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने तुलसी सरोवर और मध्य प्रदेश के अन्य जलभूत क्षेत्रों के संरक्षण और सीमांकन के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया कि तुलसी सरोवर के चारों ओर सीमांकन (मुनार स्तंभ) दो महीने के भीतर कलेक्टर अशोकनगर द्वारा पूरा किया जाए। जिसकी निगरानी राज्य जलभूत प्राधिकरण करेगा। मुख्य सचिव को निर्देशित किया गया है कि वे सभी विभागों (नगर निगम, राजस्व, वन, जल संसाधन आदि) का समन्वय करें और राज्य के 13 हजार 565 मानचित्रित जलभूत क्षेत्रों में सीमांकन स्तंभ छह माह के भीतर स्थापित करें। स्थानीय जनता को जलभूत क्षेत्रों के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर बोर्ड लगाए जाएं। तुलसी सरोवर और अन्य जलभूत क्षेत्रों में अतिक्रमण को विधिक प्रक्रिया के तहत संबंधित प्राधिकरणों द्वारा हटाया जाए। अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी। अवैध ईंट भट्‌टों का संचालन, मामला स्वत: संज्ञान में लिया
एनजीटी ने रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में अवैध ईंट भट्टों से होने वाले पर्यावरणीय उल्लंघन पर स्वतः संज्ञान लिया है। शिकायत में बताया गया कि बमनाई, नासिपुर, करमाई, जौंद्रा, कुकखाऊ और बीरान गांवों में 15-20 ईंट भट्टे अवैध रूप से सरकारी और वन भूमि तथा नदी नालों के किनारे चल रहे हैं। इन भट्टों में जहरीले पदार्थों का उपयोग हो रहा है। जिससे वायु और जल प्रदूषण, वन्य जीवन, पौध-पौधों, स्थानीय निवासियों और पालतू जानवरों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इस मामले में कहा कि मध्य प्रदेश राज्य सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर, और रतापानी वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी प्राधिकरण को नोटिस जारी किए जाए। कलेक्टर, डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों से संयुक्त समिति का गठन किया जाए, जो स्थल का दौरा कर वास्तविक और कार्रवाई रिपोर्ट छह सप्ताह में प्रस्तुत करें। छह सप्ताह के भीतर यानी, 15 अप्रैल को जवाब प्रस्तुत किया जाए।



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