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भोपाल के कुटुंब न्यायालय में एक अनोखा समझौता हुआ है. पत्नी ने डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये लेकर पति को सरकारी अफसर प्रेमिका के हवाले कर दिया है. दरअसल 42 वर्षीय पति और 54 वर्षीय अधिकारी के बीच प्रेम प्रसंग था. इस मामले में करीब पांच साल की काउंसलिंग के बाद यह सौदा डेढ़ करोड़ का तय हुआ है. अपनी बेटियों के भविष्य को देखते हुए पत्नी ने शर्तें मान लीं और पति को महिला अफसर के हवाले कर दिया है.
भोपाल में पति पत्नी के तलाक का मामला सुर्खियों में है.
भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कुटुंब न्यायालय में रिश्तों के अजीब सौदे का मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने अपने पति से तलाक देने के लिए सहमति से करीब 1.5 करोड़ में समझौता कर लिया है. काउंसलिंग के सूत्रों के अनुसार एक सरकारी विभाग में कार्यरत 42 वर्षीय अधिकारी ने अपनी 54 वर्षीय महिला अफसर के साथ संबंध स्वीकार करते हुए पत्नी से अलग होने का फैसला किया है. लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद और काउंसलिंग के बाद आखिरकार दोनों पक्षों के बीच करीब 1.5 करोड़ रुपये का आपसी समझौता तय हुआ. इस समझौते के तहत पत्नी को एक डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये नकद दिए जाएंगे, ताकि उनकी दो बेटियों का भविष्य सुरक्षित रह सके.
करीब पांच वर्षों तक चले काउंसलिंग सत्रों में पति ने स्पष्ट कहा कि वह अब वैवाहिक जीवन जारी नहीं रखना चाहता. पत्नी ने भी लगातार विवादों और मानसिक तनाव का हवाला दिया. बड़ी बेटी की शिकायत के बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जहां हिंदू मैरिज एक्ट के तहत सुलह की कोशिशें की गईं. हालांकि संबंधों में आई दरार भर नहीं सकी और अंततः आपसी सहमति से अलगाव का रास्ता चुना गया.
प्रोजेक्ट और मीटिंग के दौरान बढ़ी नजदीकियां
सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारी एक ही विभाग में कार्यरत थे. अपनी अफसर के साथ प्रोजेक्ट और मीटिंग के दौरान बढ़ी नजदीकियां निजी संबंध में बदल गईं. जब पति का व्यवहार बदला तो परिवार में तनाव बढ़ने लगा. पत्नी ने आरोप लगाया कि पति घर से दूरी बनाने लगे थे और पूरा ध्यान अपनी प्रेमिका पर लगा रहे थे; बच्ची पर बुरा असर पड़ रहा था. हर रोज की खिच-खिच हो रही थी.
बेटी की पहल से न्यायालय की एंट्री
परिवार में रोजाना के झगड़ों से परेशान 16 वर्षीय बेटी ने न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद अनिवार्य काउंसलिंग शुरू हुई. पांच वर्षों तक चली इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं. काउंसलरों ने सुलह का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे. समझौते के तहत पत्नी को भोपाल में स्थित एक डुप्लेक्स मकान, जिसकी अनुमानित कीमत 1.23 करोड़ रुपये है, और 27 लाख रुपये नकद दिए जाएंगे. कुल पैकेज लगभग 1.5 करोड़ रुपये का है. यह राशि बेटियों की शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की गई है.
लड़ाई के बजाय शांतिपूर्ण समझौता बच्चों के हित में
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आपसी सहमति से तैयार समझौता पत्र दोनों पक्षों पर बाध्यकारी होता है. इस मामले में तीसरे पक्ष यानी प्रेमिका द्वारा आर्थिक जिम्मेदारी स्वीकार करना असामान्य है. मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय शांतिपूर्ण समझौता बच्चों के हित में बेहतर माना जाता है. भोपाल का यह मामला अब शहर से बाहर भी चर्चा में है. विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते सामाजिक ढांचे में तलाक केवल भावनात्मक अलगाव नहीं, बल्कि आर्थिक योजना का भी विषय बनता जा रहा है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें