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Koteshwar Dham: बालाघाट के लांजी में बेहद पुराना मंदिर कोटेश्वर धाम है. यह मंदिर न सिर्फ एक बेहद प्राचीन शिवालय है] बल्कि महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और एतिहासिक स्तंभ भी है. कोटेश्वर का अर्थ एक करोड़ देवताओं के स्वामी है. यहां घने जंगलों और शांत प्राकृतिक वातावरण महादेव विराजे हैं. जानें महिमा…
Balaghat News: बालाघाट में घने जंगल हैं. यह इलाका आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है. ऐसे में यहां पर दूर-दराज के लोग घूमने के लिए भी आते हैं. यहां कान्हा नेशनल पार्क और तमाम दर्शनीय स्थल हैं. वहीं, एक ऐसा मंदिर भी है, जो बालाघाट ही नहीं आसपास के राज्यों में प्रसिद्ध है. यहां बात कोटेश्वर धाम लांजी मंदिर की हो रही है. बीते साल सीएम मोहन यादव बालाघाट के इस मंदिर में आए थे. इसके बाद महाशिवरात्रि के मौके पर कोटेश्वर महोत्सव की शुरुआत भी हुई. इस बार भी यहां धूम मचने वाली है.
बेहद प्राचीन कोटेश्वर धाम मंदिर
बालाघाट के लांजी में स्थित यह बेहद पुराना मंदिर है. यह मंदिर न सिर्फ एक बेहद प्राचीन शिवालय है, बल्कि एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और एतिहासिक स्तंभ भी है. कोटेश्वर का अर्थ एक करोड़ देवताओं के स्वामी से है. घने जंगल और शांत प्राकृतिक वातावरण के बीच यह मंदिर अपनी एतिहासिक भव्यता के लिए जाना जाता है.
11वीं शताब्दी मंदिर
मंदिर मध्य कालीन वास्तुकला का एक उदाहरण भी है. पुरातत्व विभाग के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण 11वीं या 12वीं शताब्दी के आसपास का माना जाता है. इसे कलचुरी राजवंश के शासन काल के दौरान बनाया गया था. ऐसा माना जाता है कि मंदिर का निर्माण सिर्फ एक चट्टान को काटकर बनाया गया है. इसका हुबहू नमूना छत्तीसगढ़ के भोरमदेव में स्थित है.
मंदिर की वास्तुकला
मंदिर में तीन गर्भग्रह हैं, जो एक मंडप से जुड़े हैं. वहीं, जितनी गहराई में गर्भग्रह हैं, उससे कई ऊंचा शिखर है. इसी मंदिर के गर्भगृह में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है. परिसर में हनुमानजी की एक संरक्षित प्राचीन प्रतिमा भी मौजूद है. फिलहाल, यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन एक संरक्षित स्मारक है.
धार्मिक मान्यता और पर्यटन
स्थानीय लोगों का मानना है कि शिवलिंग की लीला अपरंपार है. भक्तों की मानना है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती है. यहां पर महाशिवरात्रि और सावन में भयंकर भीड़ रहती है. जहां पर बालाघाट के अलावा मंडला, महाराष्ट्रा और छत्तीसगढ़ से भक्त दर्शन के लिए आते हैं. वहीं, लांजी में प्राचीन किला सहित कई पर्यटन स्थल है, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें