धार जिले के तिरला स्थित ग्राम सुल्तानपुर के प्रसिद्ध गंगा महादेव तीर्थ में रविवार को भगोरिया पर्व का शुभारंभ हो गया। होली से पूर्व पहली मांदल की थाप के साथ आदिवासी संस्कृति का यह उत्सव शुरू हुआ, जो शाम तक जारी रहा। गंधवानी, सरदारपुर और मनावर अंचल से आए नृत्य दलों ने पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-मांदल की थाप पर प्रस्तुतियां दीं। भगोरिया का शुभारंभ पांडवकालीन शिव मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ किया गया। इसके बाद पूरी घाटी लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों की गूंज से सराबोर हो गई। युवक-युवतियां रंग-बिरंगी पोशाकों में नृत्य करते दिखे। मेले में झूले-चकरी का आनंद मेले में झूले, चकरी और पारंपरिक वस्तुओं की दुकानें लगाई गईं, जिन्होंने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। हजारों श्रद्धालु और दर्शक इस आयोजन में शामिल हुए। यह पर्व आदिवासी समाज की पहचान, परंपरा और आपसी मेल-मिलाप का प्रतीक माना जाता है। सामाजिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र धार, झाबुआ और अलीराजपुर जिलों के आदिवासियों के लिए गंगा महादेव तिरला का भगोरिया सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। देखिए तस्वीरें…
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