विकास के नाम पर नगर निगम के अफसर हेरिटेज को नष्ट करने की तैयारी में हैं। शहर की आबादी को 98 साल से पानी पिलाने वाला मोतीझील वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (ओल्ड) दो साल बाद शताब्दी वर्ष मना सकता था। लेकिन निगम ने क्षमता बढ़ाने के नाम पर इस प्लांट को धराशायी करने का प्लान फाइनल कर दिया है। यह प्लांट आज भी 1928 के पंपों से पानी को शुद्ध करता है। अमृत प्रोजेक्ट-2 में शहर की बढ़ती आबादी के मद्देनजर रमौआ में नया प्लांट बनाने के साथ मोतीमहल का हेरिटेज प्लांट तोड़ने का निर्णय लिया है। निगम ने महाराष्ट्र की निजी कंपनी को प्लांट तोड़ने का काम सौंप दिया है। वहीं, पीएचई कॉलोनी में वर्ष 1919 में बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। सिर्फ सात एमएलडी के लिए हेरिटेज होगी नष्ट
अफसरों ने मोतीझील के ओल्ड प्लांट (68 एमएलडी) की क्षमता सिर्फ 7 एमएलडी बढ़ाने के नाम पर नया बनाने का फैसला किया। जबकि निगम के जानकारों का कहना है कि प्लांट के आसपास पर्याप्त भूमि है, जिसे नए प्लांट के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था। मामला जानकारी में आया है तकनीक पक्ष के बाद लेंगे निर्णय
मोतीझील ओल्ड वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के संबंध में जानकारी मिली है। इस प्रकरण के संबंध में तकनीक पक्ष से जानकारी लेने और तथ्यों को परखने के बाद निर्णय लिया जाएगा। यह काफी पुराना प्लांट है।
-संघप्रिय, निगमायुक्त, ग्वालियर नॉलेज: स्टेट टाइम का पहला वॉटर प्लांट, जहां पानी से बनती थी बिजली
भास्कर एक्सपर्ट – रमाकांत चतुर्वेदी, (पुरात्तवविद्द) धरोहर सहेजना चाहिए, ताकि भावी पीढ़ी शहर के इतिहास से परिचित हो
शहर ऐतिहासिक है। यहां की धरोहरों को सहेज कर रखना जरूरी है। मोतीझील ऐसा पहला प्लांट है जहां पर तिघरा से सीधे कैनाल के माध्यम से पानी आता था। यहां पानी से बिजली बनती थी। शहर को पानी ही नहीं बिजली भी मिलती थी। ऐसी धरोहर को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। उसे संभालकर रखें। जिससे भावी पीढ़ी को ग्वालियर का इतिहास से परिचय कराया जा सके। हेरिटेज इमारत को सहेजना जरूरी है केके सारस्वत, (सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री पीएचई)
निगम वैसे भी जरूरत के हिसाब से नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बना रहा है। मोतीझील का हेरिटेज प्लांट स्कूल-कालेज के बच्चों के ज्ञान का केंद्र भी बन सकता है। यदि प्लांट बनाना है तो नई जगह बना सकते हैं, लेकिन हेरिटेज इमारत को सहेजना जरूरी है।
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