Shivpuri News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में बेबस लाचार आशय लोगों को अपना घर आश्रम में होटल जैसी फैसिलिटी मिल रही है, जैसे ही आप आश्रम में प्रवेश करेंगे तो आप में एक अलग ही दया की भावना जागृत होने लगेगी. इस आश्रम में परेशान लोगों के लिए तमाम सुख सुविधाएं मौजूद हैं. यहां पर मौजूद लोगों को हर एक वह सुविधा दी जाती है जो एक आम आदमी को होटल में मिलती है. यहां पर कलर से लेकर उनके लिए साफ सुथरे कपड़े, शुद्ध खाना, ताजी सब्जियां और रोज रामधुन सिखाई जाती है. यह आश्रम शिवपुरी जिले से कोलारस की ओर जाते समय शारदा सॉल्वेंट के पास बनाया गया है.
अपना घर अपना आश्रम में आने वाले अनाथ और असहाय लोगों को परमेश्वर का रूप माना जाता है और उन्हें सम्मानपूर्वक ‘प्रभु जी’ कहकर पुकारा जाता है. संस्थापक गौरव जैन ने वर्ष 2017 में केवल पांच प्रभु जी के साथ इस सेवा कार्य की शुरुआत हुई थी.
आश्रम में 210 लोगों के रहने की व्यवस्था
आश्रम में वर्तमान समय में 210 महिला और पुरुषों के रहने की व्यवस्था की गई है. सुव्यवस्थित कमरों, भोजनालय और दैनिक उपयोग की सुविधाओं से युक्त यह आश्रम जरूरतमंदों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है. फिलहाल यहां 180 महिला-पुरुष निवास कर रहे हैं, जिनकी देखभाल और सेवा नियमित रूप से की जा रही है.
आश्रम प्रबंधन का उद्देश्य केवल आश्रय देना ही नहीं, बल्कि यहां रहने वाले लोगों को सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान करना भी है. आश्रम की क्षमता को और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक प्रभुजी यहां निवास कर सकें. प्रबंधन का कहना है कि बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए अतिरिक्त कक्षों और सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे सेवा कार्य और अधिक प्रभावी रूप से संचालित हो सके.
आश्रम में 16 लोग व्यवस्थाओं में लगे
आश्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए यहां 16 लोगों की तैनाती की गई है, जिनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं. ये सभी कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ आश्रम में रह रहे लोगों की देखभाल करते हैं. भोजन की व्यवस्था से लेकर समय पर नाश्ता, दोपहर और रात का खाना उपलब्ध कराना, साफ-सुथरे कपड़े देना और परिसर की स्वच्छता बनाए रखना इनकी मुख्य जिम्मेदारियों में शामिल है.
इसके अलावा, आश्रम में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की दैनिक जरूरतों का ध्यान रखा जाता है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो. स्वास्थ्य, स्वच्छता और अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यह 16 सदस्यीय टीम मिलकर आश्रम की हर छोटी-बड़ी व्यवस्था संभालती है, जिससे यहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित, सम्मानजनक और संतुलित वातावरण मिल सके.
भरतपुर की तर्ज पर प्रभु जी के नाम से पुकारा जाता
भरतपुर की तर्ज पर शिवपुरी के इस आश्रम में एक अनोखी परंपरा अपनाई गई है. यहां रहने वाले सभी महिला और पुरुष सदस्यों को उनके व्यक्तिगत नाम से नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक प्रभु जी कहकर पुकारा जाता है. आश्रम प्रबंधन का मानना है कि इस संबोधन से समानता और आत्मसम्मान की भावना मजबूत होती है. बताया जाता है कि भरतपुर में संचालित अपना घर आश्रम की प्रेरणा से ही यहां यह व्यवस्था शुरू की गई है. वहां भी सभी जरूरतमंदों को प्रभु जी कहकर संबोधित किया जाता है.
अपना घर आश्रम के अध्यक्ष रमेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि इस संस्था की शुरुआत गौरव जैन द्वारा की जा रही थी. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने देखा कि एक युवा इतना बड़ा सेवा कार्य कर सकता है, तो उन्हें भी प्रेरणा मिली. इसी भावना के साथ उन्होंने आगे बढ़कर सहयोग करने का निर्णय लिया. आज उसी सोच और संकल्प का परिणाम है कि अपना घर आश्रम बनकर तैयार हो चुका है और जरूरतमंदों की देखभाल की जाती है.