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Agriculture News: अवनीश पटेल ने लोकल 18 को बताया कि खेती से पहले खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें. आखिरी जुताई के समय सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर खेत को समतल कर लें. जल निकासी की सही व्यवस्था जरूरी है क्योंकि करेला जलभराव सहन नहीं कर पाता है.
सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में फरवरी का महीना किसानों के लिए नई फसल की तैयारी का समय होता है. आलू की खुदाई के बाद खेत अक्सर खाली रह जाते हैं लेकिन अब किसान इन खाली खेतों से भी बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. फरवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च तक करेले की खेती के लिए मौसम बेहद अनुकूल रहता है. गर्मियों में करेले की बाजार में भारी मांग रहती है, जिससे किसानों को कम लागत में अच्छा मुनाफा हो सकता है. सीधी के किसान सलाहकार अवनीश पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि इस समय खाली पड़े खेतों में कल्याणपुर बारहमासी प्रजाति का करेला लगाना फायदेमंद साबित हो सकता है. यह देशी किस्म 55 से 60 दिनों में फल देना शुरू कर देती है और अच्छी पैदावार देती है. कम लागत और कम मेहनत में तैयार होने वाली यह फसल छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी लाभकारी मानी जाती है.
करेला भले स्वाद में कड़वा हो लेकिन सेहत के लिए बेहद लाभकारी है. गर्मी के मौसम में इसकी मांग तेजी से बढ़ती है. यही वजह है कि बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है. सही तकनीक अपनाकर किसान कम समय में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.
मिट्टी को भुरभुरी बनाना जरूरी
अवनीश पटेल ने बताया कि खेती से पहले खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें. अंतिम जुताई के समय सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर खेत को समतल करें. जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी है क्योंकि करेला जलभराव सहन नहीं कर पाता. रेतीली दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. बुवाई से पहले बीज को 24 घंटे पानी में भिगोना चाहिए. इसके बाद दो ग्राम कार्बेंडाजिम से प्रति किलो बीज का उपचार करें ताकि फसल को कीट और रोगों से बचाया जा सके. रोपाई के दौरान कतार से कतार की दूरी 1.5 से 2 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर रखें. बेहतर उत्पादन के लिए फूल और फल बनने के समय जैविक तरल खाद का छिड़काव करें.
मचान या ट्रेलिस विधि
उन्होंने आगे बताया कि पौधों को सहारा देने के लिए मचान या ट्रेलिस विधि अपनाएं. समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें और कीट नियंत्रण के लिए नीम तेल या बोर्डो मिश्रण का छिड़काव करें. उन्नत बीज के तौर पर किसान पूसा हाइब्रिड-1 किस्म का भी चयन कर सकते हैं, जो 55 से 60 दिन में उत्पादन देना शुरू कर देती है. सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीके से की गई खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.