ईशान किशन को लगे झटके पर एक नजर
ईशान किशन की भारतीय टीम में वापसी और पाकिस्तान के खिलाफ शानदार पारी, संघर्ष और मानसिक मजबूती की प्रेरणादायक कहानी
एक समय सुपर स्टार, फिर सवालों के दौर
दरअसल, टीम से बाहर होने के बाद सबसे बड़ा संघर्ष मैदान से ज्यादा मन के भीतर होता है. सवाल उठते हैं- क्या मुझमें कमी है? क्या मैं वापसी कर पाऊंगा? क्या दरवाजे बंद हो गए हैं? ईशान किशन के साथ भी तो यह सबकुछ हुआ है. पब्लिक के बीच चर्चा का विषय बनना और फिर दिमाग से विमर्श से हट जाना, सोशल मीडिया की राय और लगातार तुलना किसी भी युवा खिलाड़ी को विचलित कर सकती है. यह वही समय था जिसे कई लोग उनके करियर को खत्म हुआ भी मान रहे थे. लेकिन यहीं से असली कहानी शुरू होती है.
करियर का झटका बना टर्निंग पॉइंट
ईशान ने सार्वजनिक दुनिया से दूरी बनाई और खेल पर ध्यान केंद्रित किया. इसी समय उन्होंने घरेलू क्रिकेट में मेहनत की, फिटनेस पर ध्यान दिया और अपनी तकनीक को मजबूत किया और खेल के स्तर को फिर से निखारा. जानकारों की नजर में वापसी की तैयारी अक्सर खामोशी में होती है. इस दौर में वह मेहनत होती है जो सुर्खियों में नहीं आती, लेकिन ऐसे ही पलों के परिश्रम से करियर की बुनियाद बुलंदियों को छूने वाली बनाती है. फिर तो भारतीय टीम में कमबैक की कहानी भी यहीं से जन्म लेती है.
ईशान के मेंटल कमबैक की कहानी
कमबैक सिर्फ टीम में चयन भर नहीं होता, असली कमबैक तब होता है जब खिलाड़ी मैदान पर उतरकर असर छोड़ता है. ईशान ने मौका मिलते ही आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की. उनके शॉट्स में वही निडरता दिखी जो शुरुआत में उन्हें अलग बनाती थी. अंतर केवल इतना था कि अब उसमें अनुभव और संयम भी जुड़ चुका था. यह संकेत था कि कररियर के शुरुआती दौर में मिला झटका उन्हें तोड़ नहीं पाया, बल्कि और मजबूत बना गया. डीप शॉक से बाहर निकलकर हीरो बनना सिर्फ प्रतिभा का नहीं, जिद और जुनून का परिणाम है.
ईशान किशन के कमबैक की कहानी खास है, पाकिस्तान के खिलाफ मानसिक मजबूती जाहिर की.
ईशान की जिद और जज्बे ने बदली तस्वीर
क्रिकेट इतिहास गवाह है कि हर बड़े खिलाड़ी ने किसी न किसी दौर में असफलता देखी है. फर्क यह तय करता है कि कौन खिलाड़ी उस असफलता को अंत मान लेता है और कौन उसे नई शुरुआत बना देता है. ईशान किशन ने दूसरा रास्ता चुना. उन्होंने खुद को पीड़ित की तरह पेश नहीं किया, बल्कि प्रतिस्पर्धा को स्वीकार किया.पाकिस्तान के खिलाफ मैच में ईशान ने वापसी के बाद आक्रामक बल्लेबाजी से यह साफ कर दिया कि वह दबाव में टूटने वालों में नहीं हैं. उनके शॉट्स में आत्मविश्वास दिखा और चेहरे पर वही पुरानी ऊर्जा लौटी.
पिता और परिवार के सपोर्ट से उभरकर आए ईशान
ईशान किशन के दो साल बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कमबैक पर पिता प्रणव पांडे ने हाल में ही कहा था कि ईशान ने बेहद मेहनत की. उन्होंने अनुशासन को जीवन में ज्यादा महत्व दिया और हर तरीके से खुद को बेहतर बनाया. उन्होंने कहा, “Ups and downs are part of sports. He’s worked hard, and his game has improved.” उन्होंने बताया कि पिछले दो सालों में ईशान ने अपनी बैटिंग पर फोकस किया, घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और डिसिप्लिन रखा.