झाबुआ जिले के झकनावदा क्षेत्र में गिरदावरी कार्य की धीमी गति किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। शासन ने 7 फरवरी से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण किसान पंजीयन केंद्रों से खाली हाथ लौट रहे हैं। क्षेत्र में लगभग 2200 किसान है, और बिना गिरदावरी के फसल का रकबा पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहा है। झकनावदा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में अब तक 550 पात्र किसानों में से केवल 30 किसान ही अपना पंजीयन करा पाए हैं। यह स्थिति गिरदावरी कार्य की सुस्त रफ्तार को दर्शाती है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाई हो रही है। तकनीकी रूप से, गिरदावरी वह प्रक्रिया है जिसमें पटवारी खेत पर जाकर बोई गई फसल और उसके क्षेत्रफल की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करते हैं। इसी जानकारी के आधार पर किसान का पंजीयन होता है और वह अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर बेच पाता है। गिरदावरी की अंतिम तिथि 28 फरवरी निर्धारित है, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह लक्ष्य पूरा होना मुश्किल लग रहा है। यदि यह कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ, तो 7 मार्च तक चलने वाली पंजीयन प्रक्रिया का लाभ किसानों को नहीं मिल पाएगा, जिससे उन्हें अपनी उपज व्यापारियों को कम दामों पर बेचनी पड़ सकती है। कई बार लगाए पंजीयन केंद्र के चक्कर किसान मांगीलाल चौधरी, गोवर्धन सोलंकी और मनोहर गुर्जर ने बताया कि वे कई बार पंजीयन केंद्रों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन रिकॉर्ड अधूरा होने के कारण उनका नाम पोर्टल पर नहीं आ रहा है। किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सर्वे पूरा करने की मांग की है ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। ज्यादातर खसरे अपडेट इस पूरे मामले पर झकनावदा पटवारी श्याम सिंह मेड़ा का कहना है कि काम प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि अब तक 1052 किसानों की रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है और पिपलीपाड़ा क्षेत्र के भी अधिकतर खसरे अपडेट कर दिए गए हैं।
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