पॉलीहाउस में तैयार हो रहे तरबूज और खरबूज, गर्मियों में होगी पैसों की बारिश!

पॉलीहाउस में तैयार हो रहे तरबूज और खरबूज, गर्मियों में होगी पैसों की बारिश!


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पॉलीहाउस में तैयार हो रहे तरबूज और खरबूज, गर्मियों में होगी पैसों की बारिश!

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Agriculture News: तरबूज और खरबूज की खेती के लिए उम्दा जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है. खेत की गहरी जुताई करने के बाद उसमें गोबर की सड़ी खाद मिलाई जाती है. बीज सीधे खेत में या फिर नर्सरी में तैयार कर रोपे जा सकते हैं.

शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिला में किसान मौसम के अनुसार अपनी खेती की रणनीति बदल रहे हैं और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं. जिले के कोलारस विधानसभा क्षेत्र के प्रगतिशील किसान राजकुमार रघुवंशी इन दिनों अपने पॉलीहाउस में तरबूज और खरबूज की पौध तैयार कर रहे हैं. राजकुमार रघुवंशी ने लोकल 18 से कहा कि जैसे ही गर्मी का मौसम शुरू हुआ, उन्होंने अपने पॉलीहाउस में उन्नत किस्म के तरबूज और खरबूज के पौधे लगाए हैं. पॉलीहाउस में नियंत्रित तापमान और सुरक्षित वातावरण मिलने से पौधों की गुणवत्ता बेहतर रहती है और अंकुरण भी समान रूप से होता है.

उन्होंने कहा कि खेती में सबसे अहम बात पौधों की विश्वसनीयता होती है. यदि पौधा मजबूत और शुद्ध किस्म का होगा, तो उत्पादन भी अच्छा मिलेगा और बाजार में बेहतर दाम मिलेंगे. पहले उन्होंने इन पौधों पर स्वयं प्रयोग किया. अच्छे परिणाम मिलने के बाद अब वह अन्य किसानों को भी पौधे उपलब्ध कराएंगे. राजकुमार का मानना है कि यदि किसान अभी इन पौधों की रोपाई कर दें, तो गर्मियों में तरबूज और खरबूज की बंपर आवक होगी. यह फसल गर्मी के मौसम में अधिक मांग में रहती है और स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. आधुनिक तकनीक और सही समय पर खेती से किसान अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं.

गर्मी की प्रमुख नकदी फसलें
तरबूज और खरबूज गर्मी की प्रमुख नकदी फसलें हैं. सामान्यतः तरबूज की फसल 70 से 85 दिन में तैयार हो जाती है जबकि खरबूज लगभग 60 से 75 दिन में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाता है. यदि उन्नत किस्म और पॉलीहाउस या मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया जाए, तो फसल कुछ दिन पहले भी तैयार हो सकती है. बुवाई के 25–30 दिन बाद फूल आना शुरू हो जाता है और उसके 30–35 दिन बाद फल पकने लगते हैं. सही तापमान (25–35 डिग्री सेल्सियस) और संतुलित सिंचाई से उत्पादन बेहतर मिलता है.

लगाने की विधि
तरबूज और खरबूज की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है. खेत की गहरी जुताई कर उसमें गोबर की सड़ी खाद मिलाई जाती है. बीज सीधे खेत में या नर्सरी में तैयार कर रोपे जा सकते हैं. कतार से कतार की दूरी लगभग 1.5 से 2 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी 60 से 90 सेंटीमीटर रखी जाती है. ड्रिप सिंचाई और प्लास्टिक मल्चिंग का उपयोग करने से नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं. समय-समय पर संतुलित उर्वरक और कीट नियंत्रण से बेहतर पैदावार प्राप्त होती है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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