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Bageshwar Dham Kanya Vivah:झांसी की रहने वाली सोनम की शादी बागेश्वर धाम के कन्या विवाह महोत्सव में संपन्न हुई, जहां उनकी मां ने वर्षों पहले अर्जी लगाई थी. आर्थिक तंगी और 70 हजार रुपये के कर्ज के बावजूद परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा नाम पुकारे जाने पर परिवार खुशी से झूम उठा. मां दूसरों के घरों में काम कर परिवार चला रही थीं. यह कहानी संघर्ष, आस्था और उम्मीद की मिसाल बन गई है.
Bageshwar Dham Kanya Vivah. आज हम आपको झांसी की रहने वाली एक ऐसी बेटी की कहानी बताने जा रहे हैं जिसके पिता नहीं थे लेकिन मां ने हार नहीं मानी. दूसरों के घरों में झाड़ू-पोंछा किया, खाना बनाया, बर्तन धोए और परिवार का खर्च चलाया लेकिन फिर भी बेटी की शादी की चिंता सताए जा रही थी. क्योंकि आज की महंगाई के जमाने में बेटी की शादी करना मुश्किल था. इसके बाद सोनम की माता बागेश्वर धाम आईं और यहां बेटी की शादी की अर्जी लगाई और आज बेटी का बागेश्वर धाम में ही शादी हो गई.
पापा मछली पकड़ते थे
सोनम लोकल 18 से बातचीत में बताती हैं हम जिस जाति से आते हैं वहां मछली पालन का व्यवसाय किया जाता है. पापा भी मछली पालन का व्यवसाय करते थे. घर खर्च आसानी से चल जाता था लेकिन जब पापा शांत हो गए तो घर चलाना भी मुश्किल हो गया.
मम्मी घरों में बर्तन धोती हैं
हम घर में 6 बहने और एक भाई है. भाई कुछ कमाता नहीं है. ऐसे में मम्मी को मजबूरन दूसरों के घरों में खाना बनाना, झाड़ू-पोंछा करना , बर्तन धोना, ये सब करना पड़ा. अभी भी मम्मी दूसरों के घरों में झाड़ू-पोंछा करती हैं. महंगाई के इस दौर में घर खर्च चलाना ही मुश्किल हो रहा था. ऐसी स्थिति में बेटी की शादी कैसे करते? लेकिन हमारी मम्मी पिछले 3 सालों से बागेश्वर धाम से जुड़ी थी. यहां उनका आना-जाना लगा रहता है. उन्होंने ही बालाजी बागेश्वर के चरणों में शादी की अर्जी भी लगाई थी.
गुरुजी के लाइव में सुना नाम
सोनम बताती हैं कि जब लिस्ट में नाम गुरुजी बोल रहे थे तो हम मोबाइल में ही उनका लाइव देख रहे थे. जब गुरुजी ने मेरा नाम पड़ा तो पूरा परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी. हमें डर था कि हमारा नाम आएगा भी या नहीं क्योंकि यहां कितने ही फार्म आए होंगे. फिर हमारा नाम कैसे आएगा. यही सोचकर डर लग रहा था. हमारी मम्मी बालाजी बागेश्वर धाम में बहुत आस्था रखती हैं वह अभी भी मंदिर दर्शन करने गई हैं.
सोनम ने लिया प्रण
सोनम बताती हैं कि मैंने बीए तक की पढ़ाई पूरी की है. अभी मेरी छोटी बहन भी है. बालाजी बागेश्वर सरकार की कृपा से अगर मेरी नौकरी लग गई तो बहन की शादी मैं जरूर करुंगी और मम्मी को दूसरों के बर्तन नहीं धोने दूंगी.
70 हज़ार रुपए का कर्ज भी लिया
सोनम की बड़ी मम्मी की भाभी सोमवती बताती हैं कि हमारी आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि हमें अभी भी 70 हज़ार रुपए का कर्ज लेना पड़ा है. यहां तक आने और जाने के लिए भी पैसे नहीं थे. अभी घर में शादी के कार्यक्रम होते हैं तो वहां भी खर्च लगता है. बहन की शादी में टेंट लगाने के लिए भी पैसे नहीं थे. ऐसे में शादी का दहेज तो हमारे बस की बात नहीं थी. लेकिन बागेश्वर धाम में इतना सामान मिला कि आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें