कोचिंग संस्थानों द्वारा छात्रों को प्रताड़ित किए जाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने और विद्यार्थियों की आत्महत्या की रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण के लिए राज्य सरकार नए नियम बनाएगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने कोचिंग संस्थानों के साथ बैठक करके सुझाव मांगे हैं और विद्यार्थियों के मानसिक दबाव से उत्पन्न होने वाली गंभीर परिस्थितियों को रोकने के नियम सबके सुझावों पर मंथन के बाद जारी किए जाएंगे। राजधानी के सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय भोपाल में कोचिंग संस्थानों के नियमों को लेकर हुई बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग अनुपम राजन और कोचिंग संचालकों के बीच संवाद हुआ। यह संवाद सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की आत्महत्या की रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण के लिए तय की जाने वाली व्यवस्था के अंतर्गत किए गए। इसमें कोचिंग सेंटरों के लिए नियम तैयार कर उसे नोटिफाइ कर लागू किया जाएगा। स्टूडेंट्स को सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना होगा
अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने विद्यार्थियों, बैठक में शामिल करने वाले विभागों के प्रतिनिधियों, कोचिंग सेंटर संचालकों एवं समिति सदस्यों से सुझाव लिए। एसीएस राजन ने कहा कि विद्यार्थियों में बढ़ती मानसिक दबाव की स्थिति को गंभीरता से समझते हुए घटनाओं की प्रभावी रोकथाम आवश्यक है। कोचिंग संस्थानों को भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए और विद्यार्थियों को सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार विद्यार्थी जीवन की चुनौतियों और मानसिक समस्याओं का सामना नहीं कर पाते, जिसके कारण गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। इसलिए सभी संबंधित संस्थाओं के सहयोग से विद्यार्थियों के हित में एक प्रभावी नियम तैयार किया जाना है, जिससे मानसिक दबाव से उत्पन्न होने वाली गंभीर परिस्थितियों को रोकने में मदद मिल सके। हेल्पलाइन नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें
अपर मुख्य सचिव राजन ने कहा कि सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएं। साथ ही व्यापक स्तर पर इसका प्रचार प्रसार भी किया जाए। बैठक के दौरान राज्य में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण, बेहतर संचालन, निर्धारित मानकों का पालन, कोचिंग संस्थानों में सुरक्षित वातावरण, पारदर्शी शुल्क व्यवस्था, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के लिए एक समयबद्ध और पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर चर्चा की गई। साथ ही सुझाव प्राप्त किए गए। यह बैठक प्रदेश में कोचिंग संस्थानों के संचालन को सुव्यवस्थित, जवाबदेह और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने कहा कि विद्यार्थियों को यह जानकारी अवश्य होनी चाहिए कि उनके लिए ऐसे माध्यम उपलब्ध हैं, जहां वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सहायता और मार्गदर्शन पा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर उचित सहयोग और परामर्श मिलने से विद्यार्थियों को मानसिक दबाव से उबरने में सहायता मिलती है और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है।
बैठक के दौरान एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तन्यम जोशी ने प्रजेंटेशन के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी प्रदान की। बैठक में गृह विभाग, जिला न्यायालय भोपाल, विधि एवं विधायी कार्य विभाग, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान, तकनीकी शिक्षा विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग, एडिशनल डीसीपी पुलिस और एनएलआईयू के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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