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Khandwa Unique Jain Temple: जैन समाज की मान्यता है कि 100 वर्ष से अधिक पुराने मंदिर स्वतः ही तीर्थ क्षेत्र माने जाते है. इसी वजह से यह मंदिर आज जैन समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल बन चुका है. इस मंदिर की सबसे खास बात यहां विराजित भगवान पार्श्वनाथ की मूलनायक प्रतिमा है. जिसे चतुर्थ कालीन बताया जाता है. मंदिर में विराजित अन्य प्रतिमाएं भी करीब 2500 वर्ष पुरानी मानी जाती है जो अलग-अलग स्थानों पर खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी और बाद में इन्हें यहां विधिवत विराजित किया गया.
खंडवा शहर अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरे निमाड़ में एक विशेष पहचान रखता है. इस पहचान का अहम हिस्सा है सराफा बाजार में स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जो लगभग 125 से 140 साल पुराना है और अपनी भव्यता, अद्भुत नक्काशी और आध्यात्मिक शांति के लिए प्रसिद्ध है. सराफा बाजार के बीचों-बीच स्थित यह मंदिर लोगों को शोरगुल से दूर एक अनूठी शांति का अनुभव कराता है. यही कारण है कि यहां केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि हर समाज के श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है.
जैन समाज की मान्यता है कि 100 वर्ष से अधिक पुराने मंदिर स्वतः ही तीर्थ क्षेत्र माने जाते है. इसी वजह से यह मंदिर आज जैन समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल बन चुका है. इस मंदिर की सबसे खास बात यहां विराजित भगवान पार्श्वनाथ की मूलनायक प्रतिमा है. जिसे चतुर्थ कालीन बताया जाता है. मंदिर में विराजित अन्य प्रतिमाएं भी करीब 2500 वर्ष पुरानी मानी जाती है जो अलग-अलग स्थानों पर खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी और बाद में इन्हें यहां विधिवत विराजित किया गया.
LOCAL 18 से बातचीत में पोरवार दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार जैन भटियान बताते है कि यह मंदिर पूरी तरह पत्थरों से निर्मित है और इसमें की गई नक्काशी अत्यंत बारीक और कलात्मक है. मंदिर की दीवारों, स्तंभों और शिखर पर की गई कारीगरी आज भी उस दौर की स्थापत्य कला को जीवंत रूप में दर्शाती है. उन्होंने बताया कि मंदिर में कई स्थानों पर सोने की परत से की गई नक्काशी भी देखने को मिलती है जो इसे और भी विशिष्ट बनाती है. यही वजह है कि यह मंदिर खंडवा की पुरातन धरोहरों में विशेष स्थान रखता है.
जैन समाज के वरिष्ठ सदस्य सुनील जैन बताते है कि आज जिसे हम “दादाजी की नगरी खंडवा” कहते हैं, उसका प्राचीन नाम खांडव वन था. इतिहास के अनुसार यह क्षेत्र हजारों वर्ष पहले जैन तीर्थों से परिपूर्ण था. यहां की नदियों और आसपास के क्षेत्रों में खुदाई के दौरान कई बार जैन भगवानों की प्रतिमाएं मिली है. उनका कहना है कि यह क्षेत्र पहले एक बड़ा तीर्थ हुआ करता था. जहां अनेक जैन मंदिर स्थित थे. समय के साथ आबादी बदली, लेकिन यह पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर आज भी उस प्राचीन इतिहास का जीवंत प्रमाण बना हुआ है.
वर्तमान समय में खंडवा में करीब 500 से 600 जैन परिवार निवास कर रहे है जबकि पहले यह संख्या लगभग 1500 परिवारों तक थी. इसके बावजूद यह मंदिर आज भी जैन समाज की आस्था का केंद्र बना हुआ है. मंदिर प्रतिदिन सुबह 4 बजे से 11 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही एक अलग ही शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है. यह मंदिर न सिर्फ जैन समाज के लिए, बल्कि पूरे खंडवा शहर की 125 साल पुरानी अमूल्य धरोहर के रूप में पहचाना जाता है. जहां इतिहास, कला और आस्था एक साथ जीवित नजर आते है.