साल का पहला कंकड़ाकृति सूर्य ग्रहण: भारत में नहीं होगा दृश्य, अटलांटिक में खग्रास, हिंद और प्रशांत महासागर में खंडग्रास – Bhopal News

साल का पहला कंकड़ाकृति सूर्य ग्रहण:  भारत में नहीं होगा दृश्य, अटलांटिक में खग्रास, हिंद और प्रशांत महासागर में खंडग्रास – Bhopal News




फाल्गुन कृष्ण अमावस्या (17 फरवरी) को वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा। ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार यह कंकड़ाकृति (आंशिक/वलयाकार स्वरूप का) सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण अटलांटिक महासागर में खग्रास तथा हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में खंडग्रास के रूप में दृष्टिगोचर होगा।
भारतीय समयानुसार ग्रहण का प्रारंभ दोपहर 3:26 बजे और मोक्ष सायं 7:57 बजे होगा। इस ग्रहण का ग्रासमान 0.962 बताया गया है। वर्ष 2026 का यह पहला सूर्य ग्रहण है, हालांकि भारत में दृश्य न होने के कारण इसका धार्मिक प्रभाव यहां मान्य नहीं माना जाएगा।
15 दिन बाद 3 मार्च को दूसरा ग्रहण
पंडित गौतम ने बताया कि इस ग्रहण के ठीक एक पखवाड़े बाद 3 मार्च को दूसरा ग्रहण लगेगा, जो भारत में दिखाई देगा। ऐसे में खगोलीय दृष्टि से यह अवधि महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ज्योतिषीय दृष्टि से अशांति और जलीय क्षेत्रों पर असर की आशंका
ज्योतिषाचार्य के अनुसार वर्तमान में ग्रह स्थिति पंचग्रही योग के प्रभाव में है। उनके मुताबिक ग्रहण काल में विश्व स्तर पर अशांति, तनाव और प्राकृतिक प्रकोप की आशंका बन सकती है। विशेष रूप से जलीय क्षेत्रों में उथल-पुथल या संघर्ष जैसी स्थितियां उत्पन्न होने की संभावना जताई गई है।



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