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Paan Leaf Farming Tips: पान की खेती के लिए खेत में लकड़ी, बांस या फूस से शेड तैयार किया जाता है, जिससे अंदर छाया और नमी बनी रहती है. इसके चारों ओर नेट (जाल) लगाया जाता है और ऊपर बांस की छत बनाई जाती है ताकि पौधों को छनकर धूप मिल सके.
खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा और निमाड़ क्षेत्र में अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ नकदी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इन्हीं में पान की खेती किसानों के लिए कम जमीन में ज्यादा मुनाफा देने वाला बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है. पान का पत्ता न केवल धार्मिक और सामाजिक परंपराओं का अहम हिस्सा है बल्कि यह किसानों के लिए आय का मजबूत जरिया भी बन चुका है. विशेषज्ञों के अनुसार, एक एकड़ में पान की खेती कर किसान सालाना 8 से 10 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. कृषि से जुड़े राजू पटेल लोकल 18 को बताते हैं कि निमाड़ और खंडवा जिले के रुस्तमपुर सहित कई गांवों में किसान पान की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. इस खेती के लिए खास प्रकार की छायादार संरचना बनाई जाती है, जिसे बरेजा या स्थानीय भाषा में ‘बांस का टपर’ कहा जाता है. इस संरचना का उद्देश्य पान की बेल को तेज धूप, हवा और मौसम के प्रतिकूल प्रभाव से बचाना होता है.
पान की खेती के लिए खेत में बांस, फूस या लकड़ी से शेड तैयार किया जाता है, जिससे अंदर छाया और नमी बनी रहती है. इसके चारों ओर नेट लगाया जाता है और ऊपर बांस की छत बनाई जाती है ताकि पौधों को छनकर धूप मिल सके. बरेजा के अंदर पान की कलम को लाइन से लगाया जाता है, जिससे देखरेख और तुड़ाई आसान हो जाती है. इसके साथ ही नमी बनाए रखने के लिए ड्रिप सिंचाई और फॉगर सिस्टम का उपयोग किया जाता है.
उपजाऊ मिट्टी और सही तापमान जरूरी
पान की खेती के लिए दोमट या काली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो. इसके लिए 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान आदर्श होता है. खेत की अच्छी तरह जुताई कर बेड तैयार किए जाते हैं और 5 से 6 इंच लंबी स्वस्थ कलमों को निश्चित दूरी पर लगाया जाता है. नियमित सिंचाई और जैविक खाद का उपयोग करने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं.
7 से 8 महीने में शुरू हो जाती है कमाई
पान की खेती शुरू करने के लगभग 7 से 8 महीने बाद पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है. एक पौधा करीब एक साल तक लगातार पत्तियां देता है और एक पौधे से औसतन 150 से 200 पत्ते मिल सकते हैं. एक बार बरेजा तैयार होने के बाद किसान 2 से 3 साल तक लगातार उत्पादन ले सकते हैं, जिससे उनकी आय स्थिर बनी रहती है.
बाजार में हमेशा बनी रहती है मांग
बाजार में पान के पत्ते की कीमत लगभग एक रुपये या उससे अधिक होती है. यदि बड़े स्तर पर खेती की जाए, तो एक एकड़ से 8 लाख रुपये या उससे अधिक की कमाई संभव है. देसी पान, बंगला पान, मीठा पान और कपूरी पान जैसी कई किस्मों की बाजार में अच्छी मांग रहती है, खासकर पूजा-पाठ और पान दुकानों में इसकी खपत लगातार बनी रहती है.
विशेषज्ञ डॉक्टर बोबडे का कहना है कि पान की खेती कम जमीन में ज्यादा मुनाफा देने वाली खेती है. सही तकनीक, उचित देखरेख और बाजार की जानकारी के साथ किसान इस खेती से अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं. यही वजह है कि अब निमाड़ क्षेत्र के कई किसान पान की खेती को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.