50 सालों से एक बार भी नहीं रुका रामायण, यहां बजरंगबलि के हाथ में गदा नहीं, शिवलिंग है, जानें कहां है ये अनोखा मंदिर

50 सालों से एक बार भी नहीं रुका रामायण, यहां बजरंगबलि के हाथ में गदा नहीं, शिवलिंग है, जानें कहां है ये अनोखा मंदिर


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बजरंगबलि के हाथ में गदा नहीं, शिवलिंग है, जानें कहां है ये अनोखा मंदिर

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Khargone Unique Mandir: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित ओखलेश्वर धाम का हनुमान मंदिर अपनी अनोखी मूर्ति के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है, जहां हनुमानजी के हाथ में शिवलिंग स्थापित है. इस मंदिर में साल 1976 से लगातार अखंड रामायण का पाठ चल रहा है, जिसका नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है. विंध्याचल के घने जंगलों में स्थित यह धाम त्रेता युग की मान्यताओं से जुड़ा माना जाता है. यहां रोहिणी नक्षत्र के दिन विशेष चोला चढ़ाया जाता है और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ओंकारदास महाराज की तपस्या से प्रसिद्ध हुआ यह स्थान आज आस्था और चमत्कार का केंद्र बना हुआ है.

Khargone Unique Bajrangbali Mandir: खरगोन जिले के विंध्याचल के घने जंगलों में स्थित ओखलेश्वर धाम का हनुमान मंदिर अपनी अनोखी पहचान की वजह से देशभर में चर्चा में रहता है. यहां हनुमानजी की मूर्ति बिल्कुल अलग है. आमतौर पर उनके हाथ में गदा या संजीवनी पर्वत दिखाई देता है, लेकिन यहां वे अपने हाथ में शिवलिंग धारण किए हुए हैं. यही वजह है कि इसे दुनिया का इकलौता मंदिर कहा जाता है.

50 साल से लगातार चल रही अखंड रामायण
मंदिर के पुजारी पंडित सुभाष प्रसाद पुरोहित बताते हैं कि साल 1976 से यहां 24 घंटे अखंड रामायण का पाठ जारी है. बिना रुके चल रहे इस पाठ की वजह से मंदिर का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है. यहां एक खास परंपरा भी है हनुमानजी को चोला हर मंगलवार या शनिवार को नहीं, बल्कि महीने में एक बार रोहिणी नक्षत्र के दिन ही चढ़ाया जाता है. उस दिन हजारों भक्त यहां पहुंचते हैं.

त्रेता युग से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि भगवान राम और रावण के युद्ध से पहले रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापना के लिए हनुमानजी शिवलिंग लेकर जा रहे थे. रास्ते में वे महर्षि वाल्मीकि के आश्रम के पास रुके और देर हो गई. कहा जाता है कि वही शिवलिंग आज भी तमिलनाडु के धनुषकोटि में स्थापित है. ओखलेश्वर धाम इसी कथा से जुड़ा माना जाता है.

चमत्कार की चर्चा
स्थानीय लोग बताते हैं कि कई बार हनुमानजी की मूर्ति में पलक झपकने जैसा दृश्य दिखाई देता है. कई श्रद्धालु इसे अपने कैमरे में कैद करने का दावा भी करते हैं. यहां आने वाले भक्तों को प्रसाद में छाछ दी जाती है, जो इस धाम की अलग पहचान है.

संत ओंकारदास महाराज का योगदान
माना जाता है कि ओंकारदास जी महाराज ने इस स्थान को पहचान दिलाई. घने जंगलों के बीच उन्होंने तपस्या की और मंदिर को व्यवस्थित कर एक बड़े धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया. आज यह धाम ओखलेश्वर महादेव और ओखलेश्वर हनुमान दोनों रूपों में प्रसिद्ध है.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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