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Drip Irrigation Mulching Benefits: शिवपुरी जिले में गर्म और शुष्क जलवायु गर्मियों की बेल वाली सब्जियों और फलों की खेती के लिए अनुकूल है. अगर किसान उन्नत तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग अपनाएं, तो तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी की खेती कम समय में लाभकारी साबित हो सकती है. सही बीज, समय पर बुवाई और उचित देखभाल से पानी की बचत होती है और किसान प्रति एकड़ अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
रिपोर्टर, आशीष पांडे
Drip Irrigation Mulching Benefits: शिवपुरी जिले की जलवायु गर्म और शुष्क है, जो गर्मी के मौसम में बेल वाली सब्जियों और फलों के लिए अनुकूल मानी जाती है. यदि किसान समय रहते उन्नत तकनीक अपनाएं, तो वे अच्छी आमदनी कमा सकते हैं. खासतौर पर ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग पद्धति के साथ तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी की खेती लाभकारी सिद्ध हो रही है. ये फसलें कम समय में तैयार होती हैं और बाजार में गर्मियों में इनकी मांग बहुत अधिक रहती है. ड्रिप से पानी की बचत होती है और पौधों को संतुलित पोषण मिलता है, जिससे उत्पादन बढ़ता है. सही बीज चयन, समय पर बुवाई और उचित देखभाल से किसान प्रति एकड़ अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. गर्मी के सीजन में यह खेती किसानों के लिए बंपर कमाई का जरिया बन सकती है.
इन फसलों से होगी बंपर कमाई
गर्मी शुरू होने से पहले यदि किसान खीरा, ककड़ी, तरबूज और खरबूजा की बुवाई कर दें, तो उनकी फसल सीजन के पीक समय पर तैयार हो जाती है. बाजार में इन फलों और सब्जियों की मांग अधिक रहती है, जिससे अच्छे दाम मिलते हैं. कम अवधि में तैयार होने वाली ये फसलें कम लागत में अधिक उत्पादन देती हैं. सही देखभाल और उन्नत तकनीक अपनाकर किसान प्रति एकड़ हजारों से लाखों रुपये तक कमा सकते हैं. समय पर सिंचाई और खाद प्रबंधन से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं.
मल्चिंग प्रक्रिया
मल्चिंग में खेत की मेड़ों पर प्लास्टिक शीट बिछाई जाती है, जिससे नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं. पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर समतल किया जाता है, फिर बेड बनाकर ड्रिप लाइन बिछाई जाती है. उसके बाद प्लास्टिक मल्च शीट को कसकर फैलाया जाता है और किनारों को मिट्टी से दबाया जाता है. जहां पौधे लगाने होते हैं, वहां छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं. इस प्रक्रिया से पानी की बचत होती है, मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है और उत्पादन बढ़ता है.
कितने दिन में तैयार होगी फसल
तरबूज और खरबूजा की फसल आमतौर पर 65 से 80 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि खीरा और ककड़ी 45 से 60 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं. यदि उन्नत बीज, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया जाए, तो फसल जल्दी और बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार होती है. समय पर खाद, कीटनाशक और सिंचाई का ध्यान रखने से उत्पादन अधिक मिलता है. सही समय पर बाजार में फसल पहुंचाने से किसानों को बेहतर कीमत मिलती है और मुनाफा बढ़ता है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें