उन्होंने तपती दुपहरी, गर्मी, थकान और मजदूरों के साथ दुबई में रहते हुए धोनी की बायोपिक- धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी सैकड़ों बार देखी है. खासकर वो सीन, जब धोनी रेलवे की नौकरी छोड़कर भागकर ट्रेन पकड़ते हैं.
“जब मैं फिल्म में धोनी को भागते हुए देखता था, तो मुझे अपनी सेल्समैन की वर्दी चुभने लगती थी. मुझे लगता था कि अगर मैं आज इस ‘दुबई की नौकरी’ वाली ट्रेन से नहीं उतरा, तो मैं कभी क्रिकेटर नहीं बन पाऊंगा. मैं खुद को उस प्लेटफॉर्म पर खड़ा महसूस करता था जहां एक तरफ घर की गरीबी थी और दूसरी तरफ मेरा अधूरा सपना.”
दुबई की गर्मी में 12-14 घंटे काम करने के बाद जब शरीर जवाब दे देता था, तो वह फिल्म उन्हें यह यकीन दिलाती थी कि
“संघर्ष अस्थायी है, सफलता स्थायी. फिल्म देखते हुए मुझे धोनी नहीं, बल्कि अपना चेहरा नजर आता था.”
मगर क्या नौकरी छोड़कर उनके लिए वापस आना आसान था?
नहीं, क्योंकि लोग उनकी मां से कहते थे कि
“आपका बेटा पागल हो गया है, अच्छी-भली दुबई की नौकरी छोड़कर धूप में पसीना बहा रहा है.” उस्मान बताते हैं कि वह सुबह 4 बजे उठकर दौड़ने जाते थे ताकि लोगों के तानों से बच सकें और अपना पूरा ध्यान खेल पर लगा सकें. आज वही पड़ोसी उनके घर के बाहर मिठाइयां बांटते हैं.
मगर इतने अलग तरीके से, अचानक उस्मान को पाकिस्तानी टीम में मौका कैसे मिला?
इसके पीछे है एक नाम पाकिस्तानी बल्लेबाज फखर जमान. फखर जमान तक उस्मान एक दोस्त के जरिए पहुंचे, जहां फखर नेट प्रैक्टिस कर रहे थे. उस्मान ने उन्हें नेट पर गेंदबाजी की और अपने ‘मिस्टीरियस पॉज’ से फखर को लगातार तीन-चार गेंदों पर पूरी तरह छका दिया. फखर इतने हैरान हुए कि उन्होंने नेट सेशन रुकवा दिया और उस्मान से पूछा,
“तुम अब तक कहां थे?” फखर ने ही तुरंत खैबर पख्तूनख्वा के सिलेक्टर्स और कोच वजाहतुल्लाह वस्ती को फोन किया और कहा कि “एक लड़का मिला है जिसे दुनिया ने अब तक नहीं देखा.”
फखर ज़मान ने बाद में एक इंटरव्यू में कहा,
“मैंने बहुत से टैलेंटेड लड़के देखे हैं, लेकिन उस्मान की आंखों में एक अलग किस्म की ‘जिद’ थी. वो इंसान जिसने लेबर कैंप में रहकर सपना देखा हो, वह मैदान पर हार मानने के लिए नहीं आता. मुझे उसकी गेंदबाजी से ज्यादा उसकी कहानी ने प्रभावित किया.”
फखर का ‘सिस्टम’ से लड़ना
पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट के ढांचे में एक आउटसाइडर के लिए जगह बनाना मुश्किल होता है. लेकिन फखर ने उस्मान के लिए ‘पर्सनल गारंटी’ ली. फखर ने खैबर पख़्तूनख्वा के कोचों और चयनकर्ताओं को फोन किया और कहा, “मेरे पास एक ऐसा गेंदबाज है जिसे नेट्स पर खेलना नामुमकिन है. आप बस इसे एक बार देख लें.” फखर के कहने पर ही उन्हें ट्रायल में शामिल किया गया. फखर ने उन्हें अपने क्रिकेट किट और जूते भी स्पॉन्सर किए ताकि उस्मान को किसी चीज की कमी न हो.
फखर ने उस्मान को न केवल टीम में जगह दिलाने में मदद की, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी तैयार किया. जब उस्मान के एक्शन पर पहली बार सवाल उठा और वह डर गए कि उनका करियर खत्म हो जाएगा, तब फखर ने उनसे कहा था, “तुम डरो मत, तुम पाक-साफ हो. बस अपनी मेहनत जारी रखो, बाकी मैं देख लूंगा.” फखर ज़मान की ही सिफारिशों और उस्मान की खुद की मेहनत का नतीजा था कि क्वेटा ग्लैडिएटर्स के मेंटर सरफराज अहमद तक उनकी चर्चा पहुंची. सरफराज ने जब उस्मान का वीडियो देखा, तो उन्होंने तुरंत उन्हें अपनी टीम में शामिल करने का फैसला किया.
उस्मान तारिक
उस्मान ने क्रिकेटर बनने से पहले क्या-क्या किया?
उस्मान तारिक अभी 30 साल के हैं और उनका जन्म 7 जून 1995 को खैबर पख्तूनख्वा के नौशहरा में हुआ था. घर की माली हालत ठीक न होने की वजह से उन्हें बहुत कम उम्र में ही काम की तलाश में भटकना पड़ा, यहां तक कि वह काम ढूंढने अफगानिस्तान तक चले गए थे. इसके बाद वह दुबई चले गए, जहां उन्होंने एक होटल में प्याज काटने से लेकर सेल्समैन तक की छोटी-मोटी नौकरियाँ कीं. दुबई में उनका संघर्ष इतना कड़ा था कि वह सोनापुर के एक लेबर कैंप में रहते थे, जहां एक छोटे से कमरे में उनके साथ 20 और लोग रहते थे. इतनी तंगी और भीड़-भाड़ के बीच भी उन्होंने अपने क्रिकेटर बनने के सपने को मरने नहीं दिया.
बॉलिंग एक्शन पर विवाद
तमाम विवादों के बाद भी, उनका बॉलिंग एक्शन ICC क्लियर कर चुकी है. उस्मान कहते हैं, उनके अनोखे एक्शन के पीछे कोई बनावटी तरीका नहीं, बल्कि एक शारीरिक कारण है. उनकी कोहनी ‘डबल-जॉइंटेड’ है, जिससे उनका हाथ थोड़ा अलग मुड़ता है. पीसीबी (PCB) और आईसीसी (ICC) के बायोमैकेनिकल टेस्ट में उन्हें पूरी तरह से क्लियर किया जा चुका है.
नेशनल टीम में मौका कैसे मिला?
उस्मान तारिक के लिए पीएसएल (PSL) में क्वेटा ग्लैडिएटर्स की तरफ से खेलना उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा. यहाँ उन्होंने अपनी जादुई गेंदबाजी से सबको हैरान कर दिया, जिसके बाद उन्हें कैरिबियन प्रीमियर लीग (CPL) में खेलने का मौका मिला. वहां ट्रिनबागो नाइट राइडर्स के लिए उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 20 विकेट चटकाए, जिसे देखकर पाकिस्तानी चयनकर्ताओं ने उन्हें तुरंत नेशनल टीम में बुला लिया. आखिरकार, 1 नवंबर 2025 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनका सपना सच हुआ और उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला. आज यानी फरवरी 2026 में, वह पाकिस्तान की टी20 वर्ल्ड कप टीम के एक मुख्य गेंदबाज बन चुके हैं.