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Chhatarpur News: अगर तेंदू बेर थोड़ा सा भी पक गया, तो इसमें तुरंत कीड़े लग जाते हैं क्योंकि यह बहुत मीठा होता है, इसलिए जब यह हरा दिखने लगे, तो ही खा लेना चाहिए. पीला पड़ने पर इसमें कीड़े लग जाते हैं.
छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में इस समय मार्केट में एक ऐसा बेर आ चुका है, जिसे हर कोई खाना पसंद करता है. हालांकि यह 30 दिनों तक ही मार्केट में आता है. यह दूसरे बेर से अलग होता है. साथ ही यह अपनी मिठास के लिए जाना जाता है. ललजु अनुरागी ने लोकल 18 से कहा कि छतरपुर जिले में बेर तो अलग-अलग वैरायटी के पाए जाते हैं. ठंड के मौसम में सबसे जल्दी आने वाला चाहें छोटा बेर जरिया का बेर हो, या फिर दूसरे बेर हों लेकिन लोगों में सबसे ज्यादा जिस बेर की डिमांड होती है, वह तेंदू बेर है. उन्होंने कहा कि छतरपुर मार्केट में तेंदू बेर फरवरी माह में आना शुरू हो जाता है. लगभग चैत्र महीने तक यानी मार्च तक यह बाजार में देखने को मिल जाता है. इसी समय मार्केट में दूसरे बेर भी आते हैं लेकिन इससे अच्छा बेर कोई नहीं होता है.
ललजु बताते हैं कि तेंदू बेर सभी बेरों में दिखने में लंबा और बड़ा होता है. साथ ही यह टाइट होता है. अभी इस बेर की शुरुआत है, तो अभी यह छोटा आ रहा है लेकिन अभी आगे और बड़ा साइज का उपलब्ध होगा.
मिठास की वजह से लग जाते हैं कीड़े
ललजु बताते हैं कि इस बेर की मिठास ही इसे सभी बेरों से खास बनाती है. जहां दूसरे बेर खट्टे होते हैं, वहीं यह बेर कच्चा दिखने पर भी खट्टा नहीं होता है. अगर यह थोड़ा सा भी पक गया, तो इसमें कीड़े तुरंत लग जाते हैं क्योंकि यह बहुत मीठा होता है, इसलिए इसे हरा दिखने पर ही खा लेना चाहिए. पीला पड़ने पर इसमें कीड़े लगने शुरू हो जाते हैं.
ललजु आगे बताते हैं कि हमारे यहां तो इसके पेड़ लगे हैं, इसलिए हम तो तेंदू बेर सालों से बेच रहे हैं. छतरपुर जिले में इस बेर को सबसे ज्यादा खाया जाता है, इसलिए यह बेर महंगा भी होता है और मार्केट में जल्दी बिक जाता है. इस बेर के भाव की बात करें, तो यह 40 रुपये किलो बिकता है. वहीं दूसरे देसी बेर 20 से 30 रुपये किलो बिकते हैं. गांव के हाट बाजार में तेंदू बेर सस्ता है लेकिन शहरी मार्केट में 60 से 80 रुपये किलो बिकता है.
तेंदू बेर खाने के फायदे
बता दें कि इसमें मौजूद भरपूर फाइबर पेट की समस्याओं को दूर करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत होने के कारण यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और त्वचा रोगों में भी राहत देता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.