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Chambal River Story: चंबल नदी को लेकर सदियों से कई रहस्यमयी कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें राजा रंतिदेव की पशु बलि और द्रौपदी के श्राप की कहानी शामिल है. मध्यप्रदेश से निकलकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक बहने वाली यह नदी धार्मिक रूप से अलग पहचान रखती है. लोककथाओं में इसे श्रापित कहा जाता है, जबकि वैज्ञानिक इसे अपेक्षाकृत स्वच्छ नदी मानते हैं. चंबल के बीहड़ कभी डाकुओं के लिए कुख्यात रहे, जिससे इसकी छवि और रहस्यमयी बन गई. राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में पाए जाने वाले घड़ियाल इस बात का संकेत हैं कि नदी का पारिस्थितिकी तंत्र आज भी संतुलित है.
Chambal Cursed River Story: भारत में नदियों को मां का दर्जा दिया जाता है, लेकिन चंबल नदी को लेकर अलग ही मान्यताएं हैं. मध्यप्रदेश के महू क्षेत्र (इंदौर) से निकलकर करीब 965 किमी बहने वाली यह नदी राजस्थान और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरती है. पानी साफ है, प्रदूषण कम है फिर भी इसे कई लोग “श्रापित” मानते हैं.
राजा रंतिदेव और पशु बलि की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंबल का प्राचीन नाम “चर्मण्यवती” था. कथा मिलती है कि महाभारत काल के राजा रंतिदेव ने विशाल यज्ञ कराया, जिसमें बड़ी संख्या में पशुओं की बलि दी गई. कहा जाता है कि रक्त से निकली धारा ही आगे चलकर चर्मण्यवती बनी. इसी वजह से नदी को अपवित्र समझा गया. ध्यान रहे यह लोककथा है; इतिहास और विज्ञान नदियों की उत्पत्ति को प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं से जोड़ते हैं.
द्रौपदी का श्राप
एक और कथा द्रौपदी से जुड़ी है. लोकमान्यता है कि द्युत क्रीड़ा के बाद हुए अपमान से आहत होकर द्रौपदी ने उस क्षेत्र और नदी को श्राप दिया कि यहां पूजा नहीं होगी. हालांकि शास्त्रीय ग्रंथों में द्युत क्रीड़ा का स्थान हस्तिनापुर बताया गया है, चंबल तट का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता. फिर भी लोकविश्वास में यह कथा गहराई से रची-बसी है.
“बागियों की नदी” क्यों कहलायी?
चंबल के बीहड़ लंबे समय तक डाकुओं के कारण चर्चित रहे. ऊबड़-खाबड़ भूगोल और सामाजिक हालातों ने इसे “बागियों की धरती” बना दिया. समय बदला, कानून-व्यवस्था मजबूत हुई और आज यह इलाका पर्यटन व संरक्षण के लिए पहचाना जाता है.
घड़ियाल बताते हैं सच्चाई
दिलचस्प बात यह है कि चंबल देश की उन चुनिंदा नदियों में है जहां घड़ियाल बड़ी संख्या में मिलते हैं. संवेदनशील प्रजाति होने के कारण घड़ियाल सिर्फ साफ, गहरे और बहते पानी में पनपते हैं. राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में इनके संरक्षण के प्रयास जारी हैं. यानी आस्था और लोककथाओं से अलग, पर्यावरण के पैमाने पर चंबल एक संतुलित और अपेक्षाकृत स्वच्छ नदी मानी जाती है.
निष्कर्ष: चंबल की कहानी मिथकों, इतिहास और प्रकृति तीनों का संगम है. श्राप की दास्तानें अपनी जगह, लेकिन इसकी स्वच्छ धारा और जैव विविधता एक अलग ही सच बयान करती है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें