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Ujjain Mahakaleshwar Temple: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल बुधवार को अपने भक्तों को पंच मुखारविंद रूप में दर्शन देंगे. कहा जाता है जिसने भी महाशिवनवरात्रि पर भगवान के अलग-अलग रूपों के दर्शन नहीं किए हों, वह आज भगवान का पंच मुखारविद दर्शन कर लाभ ले सकते हैं.
Ujjain News: धार्मिक नगरी उज्जैन विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के नाम से जानी जाती है. यह स्थान केवल देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है. यहां हर त्योहार बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. खासतौर पर महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि का पर्व बेहद खास होता है. शिव नवरात्रि के नौ दिनों तक भगवान महाकाल अलग-अलग रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
महाशिवरात्रि के बाद साल में एक दिन ऐसा भी आता है, जब भगवान महाकाल पंच मुखौटे स्वरूप में दर्शन देते हैं. यह स्वरूप बहुत दुर्लभ और खास माना जाता है. जो भक्त शिव नवरात्रि के दौरान मंदिर नहीं आ पाते, वे इस दिन पंचमुखी रूप के दर्शन कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं. मान्यता है कि इस दिव्य रूप के दर्शन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
पंच मुखौटे से होता है विशेष श्रृंगार
महाशिवरात्रि के बाद बाबा महाकाल का पंच मुखौटे में विशेष श्रृंगार किया जाता है. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकाल के दर्शन करते हैं. महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व शिव नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है. भस्म रमाने वाले बाबा महाकाल को दूल्हा बनाया जाता है. रोज 9 दिन तक अलग-अलग रूपों में बाबा महाकाल का श्रृंगार किया जाता है, ऐसे में बाबा महाकाल के 9 रूप के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है
पंच मुखौटे के दर्शन से मिलता है यह लाभ
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने Local 18 को बताया कि मान्यता है कि इन 9 दिनों तक महाकाल के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. महाशिवरात्रि के बाद महाकाल का पंच मुखौटे में श्रृंगार किया जाता है. मान्यता है कि ऐसे लोग जो शिव नवरात्रि में दर्शन नहीं कर पाए और अगर बाबा महाकाल के पंच मुखौटे के दर्शन कर लेते हैं तो उन्हें शिव नवरात्रि के सभी दर्शनों का फल मिलता है.
अवंतिका में पांच बार क्यों मनाई जाती है नवरात्रि?
उन्होंने आगे बताया कि अवंतिका नगरी (उज्जैन) में माता हरसिद्धि का भी मंदिर है, जो 51 शक्तिपीठों में से एक है, इसलिए यहां की मान्यता और बढ़ जाती है क्योंकि अवंतिका में शिव के साथ शक्ति विराजमान हैं, इसलिए भी यहां का महत्व बढ़ जाता है. यहां नवरात्रि का पर्व भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इसी के साथ-साथ यहां शिव नवरात्रि मनाई जाती है. यहां महाकाल मंदिर में शिवरात्रि तो मनाते ही हैं लेकिन यहां 9 दिन नवरात्रि मनाने की परंपरा है, जिसे हम शिव नवरात्रि कहते हैं, जो पूरे देश में केवल उज्जैन में ही मनाई जाती है.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें