धार्मिक नगरी उज्जैन अपनी आस्था, परंपरा और विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के कारण देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहचान रखती है। यहां हर पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है, लेकिन महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। शिव नवरात्रि के नौ दिनों तक भगवान महाकाल अलग-अलग दिव्य रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दौरान देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। जो भक्त इन नौ दिनों में मंदिर नहीं आ पाते, उनके लिए महाशिवरात्रि के बाद आने वाला एक विशेष दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन बाबा महाकाल पंच मुखौटे स्वरूप में दर्शन देते हैं। यह स्वरूप बेहद दुर्लभ और दिव्य माना जाता है। मान्यता है कि पंचमुखी रूप के दर्शन से शिव नवरात्रि के नौ दिनों के दर्शन का पूरा फल प्राप्त होता है। महाशिवरात्रि के बाद बाबा महाकाल का पंच मुखौटे स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस अवसर पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। महाकाल को दूल्हा स्वरूप में सजाया जाता है। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा के अनुसार, मान्यता है कि शिव नवरात्रि के दौरान दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वहीं जो लोग इन दिनों में नहीं आ पाए, यदि वे पंच मुखौटे स्वरूप में बाबा महाकाल के दर्शन कर लेते हैं, तो उन्हें शिव नवरात्रि के सभी दर्शनों का फल प्राप्त होता है। तस्वीरें देखिए
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