सीधी के सरकारी संजय गांधी महाविद्यालय में 2.60 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे भवन में अनियमितताओं के आरोप हैं। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के प्रदेश सचिव विक्रांत सिंह परिहार ने प्राचार्य के साथ निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। जिसमें गुणवत्ता, पारदर्शिता और श्रमिक सुरक्षा में खामियां मिलने का दावा किया। निरीक्षण के दौरान निर्माण स्थल पर अनिवार्य सूचना बोर्ड नहीं मिला, जिससे कार्य की पारदर्शिता पर सवाल उठे। मौके पर मौजूद साइट इंजीनियर निर्माण एजेंसी का नाम नहीं बता सके और केवल ठेकेदार जेपी यादव का जिक्र किया। महाविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य MPBDC एजेंसी के जरिए हो रहा है। गुणवत्ता प्रमाणपत्र नहीं, सुरक्षा इंतजाम भी नदारद एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि निर्माण में इस्तेमाल हो रहे एएसी स्लैब/ब्लॉक और एम-25 सीमेंट ब्रिक ब्लॉक के गुणवत्ता प्रमाणपत्र व टेस्ट रिपोर्ट मौके पर उपलब्ध नहीं थे। श्रमिकों के पास हेलमेट, सेफ्टी शूज और हार्नेस बेल्ट जैसे सुरक्षा उपकरण भी नहीं पाए गए। प्राथमिक उपचार और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का भी अभाव दिखा। मजदूरों को नकद भुगतान, पीएफ कटौती में पारदर्शिता नहीं संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि मजदूरों को नकद भुगतान किया जा रहा है और पीएफ कटौती के दावों में पारदर्शिता नहीं है। निरीक्षण के समय लेबर रजिस्टर भी प्रस्तुत नहीं किया गया। निर्माण स्थल पर नंगे बिजली के तार फैले होने की बात भी सामने आई, जिससे दुर्घटना का खतरा बताया गया। देखिए तस्वीर… सचिव बोले-“यह निर्माण नहीं, सरकारी पैसे की खुली लूट” प्रदेश सचिव विक्रांत सिंह परिहार ने इस स्थिति पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह निर्माण नहीं, सरकारी पैसे की खुली लूट है। यह भवन नहीं, श्मशान घाट बन रहा है। यदि कोई हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी ठेकेदार, एजेंसी, संबंधित इंजीनियर और प्रशासन की होगी।” महाविद्यालय के प्राचार्य प्रभाकर सिंह ने निरीक्षण में सामने आई कमियों को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग को तत्काल सूचित किया जाएगा और यदि जांच में अनियमितता या गुणवत्ताहीन निर्माण की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। सुरक्षा और गुणवत्ता युक्त निर्माण के कराने की मांग प्राचार्य ने छात्रों की सुरक्षा और गुणवत्ता युक्त निर्माण के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई। एनएसयूआई ने मांग की है कि निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच, थर्ड पार्टी क्वालिटी टेस्ट और जिम्मेदार पक्षों पर त्वरित कार्रवाई की जाए, अन्यथा छात्रहित में आंदोलन किया जाएगा। निरीक्षण में सामने आए प्रमुख बिंदु-
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