IND vs SA सुपर-8 में ‘भाईयों की टक्कर’.. कहीं ‘विभीषण’ न बन जाएं टीम इंडिया के कोच, गजब का इत्तेफाक

IND vs SA सुपर-8 में ‘भाईयों की टक्कर’.. कहीं ‘विभीषण’ न बन जाएं टीम इंडिया के कोच, गजब का इत्तेफाक


IND vs SA: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सुपर-8 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. फैंस को 22 फरवरी का इंतजार है जब भारत और साउथ अफ्रीका की टीम टी20 वर्ल्ड कप 2024 के फाइनल की याद दिलाने वाली हैं. लेकिन इस टक्कर में दो भाईयों के बीच क्लैश इस मुकाबले को और भी रोमांचक बनाने वाला है. एक साउथ अफ्रीका को सपोर्ट करेगा जबकि दूसरा टीम इंडिया को जीत के लिए तैयार कर रहा है.

‘भाईयों की टक्कर’

भाईयों की लड़ाई में एल्बी मोर्कल, जो साउथ अफ्रीका के कोचिंग स्टाफ के जुड़े हैं जबकि मोर्ने मोर्कल डिफेंडिंग चैंपियन टीम इंडिया के साथ होंगे. हेड कोच गौतम गंभीर के सपोर्ट स्टाफ में शामिल होने के बाद मोर्ने मोर्कल एक साल से ज्यादा समय से टीम इंडिया के बॉलिंग कोच हैं. जबकि पूर्व SA ऑलराउंडर एल्बी मोर्कल T20 वर्ल्ड कप 2026 में एडेन मार्करम की प्रोटियाज टीम के साथ ‘स्पेशलिस्ट कंसल्टेंट’ के तौर पर काम कर रहे हैं.

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बात नहीं करते हैं दोनों भाई

रविवार को सुपर 8 में होने वाले ‘भाइयों की लड़ाई’ में कैसा महसूस होगा, यह पूछे जाने पर एल्बी ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘हम एक-दूसरे से बात नहीं करते. मुझे लगता है कि मेरी माँ, वह हमसे ज़्यादा परेशान हैं. उन्हें नहीं पता कि किसे सपोर्ट करना है, इंडिया को या साउथ अफ्रीका को.’ एल्बी मोर्कल ने बुधवार को नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में UAE के खिलाफ साउथ अफ्रीका के ग्रुप A मैच से पहले कहा.

CSK में एल्बी मोर्केल की अहम भूमिका

44 साल के एल्बी मोर्कल को MS धोनी की चेन्नई सुपर किंग्स के साथ उनके मैच जिताने वाले मैचों के लिए सबसे ज़्यादा याद किया जाता है. एल्बी 2007 से 2013 तक CSK टीम का हिस्सा थे और उन्होंने उनके लिए 85 IPL विकेट में से 76 विकेट लिए थे. उन्होंने 2007 में 147.85 के स्ट्राइक-रेट से 241 रन और 2009 में 151.14 के स्ट्राइक-रेट से 198 रन भी बनाए.

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एल्बी मोर्केल ने आगे कहा, ‘ये सभी अच्छे गेम होंगे. हां, प्रेशर, उन गेम पर ज़्यादा प्रेशर होगा क्योंकि जैसे-जैसे आप प्लेऑफ़ की ओर बढ़ेंगे. लेकिन मुझे लगता है कि हमारे पास बहुत अनुभवी बॉलर और बेहतर बैटिंग करने वाले लोग हैं, इसलिए जो लोग IPL या दूसरी लीग में खेले हैं, इंटरनेशनल क्रिकेट थोड़ा अलग है, लेकिन जो लोग उस प्रेशर को संभाल सकते हैं. इसलिए मुझे लगता है कि वे असल में उन हालात में अच्छा करेंगे जहाँ गेम पर थोड़ा ज़्यादा प्रेशर होगा.’



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