भारत और नीदरलैंड के बीच खेले गए मुकाबले में टीम इंडिया 17 रनों से बाजी मारने में कामयाब रही. इस मैच में भारतीय पारी की शुरुआत काफी स्लो रही और फिर शुरुआती ओवरो में टीम इंडिया ने विकेट भी गंवाए. तिलक वर्मा और कप्तान सूर्यकुमार ने भी काफी सधी हुई बल्लेबाज की और फिर अपनी पारी को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर पाए और अपना विकेट दे बैठे. फिर आखिरी के ओवरों में शिवम दुबे ने हार्दिक पांड्या के साथ मिलकर रन गति को तेजी से आगे बढ़ाते हुए टीम का स्कोर 200 के करीब ले गए. अब भारत क इस बल्लेबाजी करने के तरीके पर शिवम दुबे खुलकर बोले हैं. भारतीय ऑलराउंडर शिवम दुबे ने टीम की संघर्ष से भरी बल्लेबाजी को लेकर जताई चिंताओं को दूर करते हुए माना कि विश्व कप के दबाव ने बल्लेबाजों को हाल के बाईलेटरल सीरीज में दिखाई गई आक्रामक रणनीति के बजाय परिस्थितियों के हिसाब से खेलने के लिए मजबूर कर दिया है.
‘तिलक स्थिति के हिसाब’
“सर, यह विश्व कप है. खेल थोड़ा मुश्किल है, आसान नहीं. अगर हमें मनचाही शुरुआत नहीं मिलती, तो तिलक और सूर्या का खेल अलग होता है. वे हालात के हिसाब से बल्लेबाजी करते हैं. अगर स्थिति की मांग हो, तो उन्हें उसी के अनुसार बल्लेबाजी करनी पड़ती है. “अगर किसी खास परिस्थिति में तिलक को बल्लेबाजी करनी हो, तो वो करते हैं, और सूर्या के बारे में तो मुझे कुछ कहने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि वो एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो टीम को सर्वश्रेष्ठ स्थिति तक पहुंचा सकते हैं,”
तेज खेलना काफी नहीं
दुबे ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस स्तर पर टी20 क्रिकेट में सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी ही काफी नहीं होती. इसमें दबाव को संभालना और डॉट गेंदों को सही समय पर स्वीकार करना भी जरूरी होता है. “हां, जाहिर है, टी20 में डॉट बॉल खेलने पर दबाव तो आता ही है. लेकिन एक खिलाड़ी के तौर पर, एक बल्लेबाज के तौर पर, मुझे उस समय पता होता है कि अगर अभी मैं 10 गेंदों में दो रन पर हूं, तो अगली पांच गेंदों में अगर मैं दो छक्के लगा दूं, तो यह कमी पूरी हो जाएगी,”
ऑफ-स्पिन बनी टेंशन?
दुबे से भारत की ऑफ-स्पिन के खिलाफ स्पष्ट कमजोरी के बारे में भी सवाल किया गया. नामीबिया के गेरहार्ड इरास्मस ने ग्रुप स्टेज के पहले मैच में बल्लेबाजी क्रम को परेशान किया, जैसा कि पाकिस्तान के उस्मान तारिक ने किया था. नीदरलैंड के खिलाफ, आर्यन दत्त ने अभिषेक और ईशान किशन दोनों को आउट किया.
हालांकि, दुबे ने किसी बड़ी कमजोरी के सुझावों को खारिज करते हुए अपने साथियों को समाधान खोजने के लिए आश्वस्त किया.
रणनीति का दिया हवाला
“ऐसा कुछ नहीं है. इस बारे में कोई बात नहीं है क्योंकि कभी-कभी बल्लेबाज कुछ गेंदों को हिट नहीं कर पाते हैं, और हां, यह सिर्फ एक शॉट की बात है. वे उस एक शॉट को हिट करना शुरू कर देते हैं और हां, आने वाले मैचों में ऑफ-स्पिन के बारे में कोई बात नहीं होगी, जब उनसे टूर्नामेंट से पहले के द्विपक्षीय मैचों में नियमित रूप से बनने वाले 200 से अधिक के स्कोर बनाने में भारत की असमर्थता के बारे में पूछा गया, तो दुबे ने टीम की रणनीतिक समझ का बचाव करते हुए जोर दिया कि वे समझते हैं कि विभिन्न पिचों पर बेस्ट स्कोर क्या होता है.”
‘खेलना आसान नहीं…’
“सर, हम जानते हैं कि हम इस विकेट पर जितने रन बना रहे हैं, वह सर्वश्रेष्ठ स्कोर में से एक है. जैसे आज इस विकेट पर हमने 190 से अधिक रन बनाए, और इस विकेट पर खेलना आसान नहीं था. न केवल हम बल्कि कोई भी टीम जो खेल रही होगी, वह इतने रन नहीं बना पाएगी. इसलिए, मुझे लगता है कि हमारी टीम का स्कोर इस विकेट पर सर्वश्रेष्ठ स्कोर है,” उन्होंने अपनी बात समाप्त की.
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