रतलाम जिले की जावरा नगर पालिका की तत्कालीन सीएमओ नीता जैन और तत्कालीन सहायक राजस्व निरीक्षक (बाबू) विजय सिंह शक्तावत को भ्रष्टाचार के मामले में गुरुवार को 4-4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) संजीव कटारे की कोर्ट ने दोनों पर 2-2 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। साल 2021 में ठेकेदार का बिल पास करने और एफडी रिलीज करने के बदले 18,500 रुपए की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त ने बाबू को ट्रैप किया था। इस मामले में कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को दोषी करार दिया है। सहायक निदेशक अभियोजन आशा शाक्यवार ने बताया कि 9 मार्च 2021 को पवन भावसार ने उज्जैन लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। पवन ने बताया था कि उसके दोस्त सुरेश प्रजापत के लाइसेंस पर जावरा नगर पालिका के विभिन्न वार्डों में पेवर ब्लॉक, फ्लोरिंग और अन्य निर्माण कार्य किए गए थे। काम समय पर पूरा होने के बाद नगर पालिका में जमा एफडी रिलीज करने और फाइनल बिल स्वीकृत करने के लिए तत्कालीन सीएमओ नीता जैन ने कुल बिल राशि का 3 प्रतिशत कमीशन मांगा था। 26 हजार से 20 हजार रुपए में तय हुआ था सौदा लोकायुक्त ने शिकायत की पुष्टि के लिए वॉइस रिकॉर्डिंग कराई। जांच में सामने आया कि सीएमओ नीता जैन की तरफ से सहायक राजस्व निरीक्षक विजय शक्तावत ने 26 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की है। बातचीत के बाद यह राशि 20 हजार रुपए में फाइनल हुई। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप की योजना तैयार की। सीएमओ से पूछकर लिए 18,500 रुपए लोकायुक्त के ट्रैप प्लान के अनुसार, शिकायतकर्ता पवन भावसार 12 मार्च 2021 को 15 हजार रुपए लेकर पहुंचा। उसने कहा कि 5 हजार रुपए काम होने के बाद दे देगा, लेकिन राजस्व निरीक्षक शक्तावत नहीं माना। वह सीएमओ के कक्ष में गया और वापस आकर कहा कि मैडम पूरे 20 हजार रुपए मांग रही हैं। तब पवन ने 18,500 रुपए विजयसिंह शक्तावत को दे दिए। शक्तावत ने जैसे ही यह रुपए अपनी पैंट की जेब में रखे, लोकायुक्त टीम ने उसे पकड़ लिया। शक्तावत के हाथ सोडियम कार्बोनेट के घोल से धुलवाए गए, जिससे घोल का रंग गुलाबी हो गया। इन धाराओं के तहत ठहराए गए दोषी लोकायुक्त ने इस मामले में तत्कालीन सीएमओ नीता जैन (निवासी नई आबादी मंदसौर) को मुख्य आरोपी और राजस्व निरीक्षक विजयसिंह शक्तावत (निवासी लाल इमली गली जावरा) को सहआरोपी बनाया। 21 जून 2023 को रतलाम के विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। विचारण के बाद न्यायालय ने दोनों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी के तहत दोषी पाया है। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चौहान ने की।
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