मध्य प्रदेश में बचे सिर्फ 2-3 फीसदी गिद्ध: मरे पशु खाने से किडनी फेल होने के कारण 1990 से लगातार घटी संख्या, कल से शुरू होगी गणना – Burhanpur (MP) News

मध्य प्रदेश में बचे सिर्फ 2-3 फीसदी गिद्ध:  मरे पशु खाने से किडनी फेल होने के कारण 1990 से लगातार घटी संख्या, कल से शुरू होगी गणना – Burhanpur (MP) News




बुरहानपुर जिले में गिद्धों की गणना 20 फरवरी से शुरू होगी, जो 22 फरवरी तक चलेगी। वन विभाग द्वारा यह गणना गिद्धों की घटती संख्या और उनके संरक्षण के प्रयासों के तहत की जा रही है। मध्य प्रदेश में अब केवल 2 से 3 प्रतिशत गिद्ध ही बचे हैं, जो पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है। इस गणना के लिए वन विभाग ने गुरुवार शाम परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में वनकर्मियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला और प्रशिक्षण का आयोजन किया। इसमें बुरहानपुर डीएफओ विद्याभूषण सिंह, एसडीओ अजय सागर, रेंजर लक्ष सोलंकी और हरीश राठौर सहित अन्य वन अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। बुरहानपुर एसडीओ अजय सागर ने बताया कि 20 से 22 फरवरी तक तीन दिनों तक जिले के हर वन क्षेत्र में बीट गार्ड द्वारा मोबाइल ऐप ‘ईपी कलेक्ट 5’ के माध्यम से गिद्ध गणना की जाएगी। इस ऐप में गिद्धों की प्रजाति, संख्या और उनकी लोकेशन दर्ज की जाएगी, जिसका डेटा सीधे भोपाल में देखा जा सकेगा। लगभग छह महीने पहले भी जिले में गिद्ध गणना हुई थी, लेकिन तब गिद्ध नहीं मिले थे। हालांकि, असीरगढ़ सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में उनके निशान जरूर मिले थे। पहले गणना की एंट्री कागजों पर होती थी, लेकिन अब यह ऐप के जरिए की जाएगी। एसडीओ अजय सागर के अनुसार, 1990 के बाद से गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण ‘डाइक्लोफेनाक सोडियम’ नामक दवा थी, जो पशु चिकित्सकों द्वारा पशुओं को दी जाती थी। जब इन पशुओं की मृत्यु होती थी और गिद्ध उनका मांस खाते थे, तो इस दवा के कारण उनकी किडनी फेल हो जाती थी। इस दवा के कारण बड़े पैमाने पर गिद्ध विलुप्त होते गए। अब ‘डाइक्लोफेनाक सोडियम’ दवा का पशुओं को दिया जाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। वन विभाग इस सर्वे के माध्यम से गिद्धों के संरक्षण के प्रयासों की शुरुआत कर रहा है, क्योंकि ये पक्षी पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं। वन अपराध, कोर्ट केस पर चर्चा
वन मंडल बुरहानपुर के तहत वन अपराध अन्वेषण, न्यायालयीन प्रक्रिया, वन विधि और गिद्ध गणना पर कार्यशाला में प्रेजेंटेशन के माध्यम से चर्चा की गई। डीएफओ विद्या भूषण सिंह ने वन अपराध अन्वेषण, न्यायालयीन प्रक्रिया, वन विधि विषय पर प्रशिक्षण दिया। साथ ही वन अपराध अन्वेषण की बारीकियों पर शाहपुर टीआई अखिलेश मिश्रा ने बात रखी। एडीपीओ ने वन अपराधों को न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया के बारे में बताया।

यह रहे मौजूद
कार्यशाला में नेपानगर एसडीओ विक्रम सुलिया, शाहपुर रेंजर श्यामलता मरावी, बोदरली रेंजर लखनलाल वास्कले, खकनार रेंजर रितेश उईके, असीरगढ़ रेंजर धर्मेंद्र सिंह राठौर, धूलकोट रेंजर मनोज वास्कले, नेपानगर के प्रभारी रेंजर व ट्रेनी आईएफएस अजय गुप्ता, नावरा रेंजर पुष्पेंद्र जादौन सहित काफी संख्या में वनकर्मी मौजूद थे।



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