इंदौर के अस्पताल में भारी लापरवाही, HIV वॉर्ड में बिल्ली कांड, रेबीज का बना खतरा

इंदौर के अस्पताल में भारी लापरवाही, HIV वॉर्ड में बिल्ली कांड, रेबीज का बना खतरा


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इंदौर के एमवाय अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. छह महीने पहले हुए चूहा कांड में दो नवजातों की मौत के बाद अब अस्पताल में ‘बिल्ली कांड’ सामने आया है.

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सांकेतिक तस्वीर

रिपोर्ट-मिथिलेश गुप्ता/इंदौर

इंदौर के MY सरकारी अस्पताल से एक बार फिर मरीजों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य के साथ बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है. एमवाय हॉस्पिटल के HIV वॉर्ड में बिल्ली के बच्चों को जन्म दे दिया. वहीं, अब बिल्ली के बच्चे एचआईवी वॉर्ड में ही संक्रमित मरीजों के बीच घूम रहे है और सिर्फ उसी वॉर्ड तक नहीं, बल्कि पूरे ओपीडी वार्ड में घूम रहे हैं. HIV ART वार्ड से बिल्ली दूसरे मरीजों तक भी जा रही है, जिससे लोगों के संक्रमित होने का डर बना हुआ हैं. कैट के काटने से रेबीज का खतरा भी बना हुआ हैं.

हालांकि देश के सबसे स्वच्छ शहर में रोजाना लगभग 10 से लेकर 5 केस रोजाना सामने आ रहे हैं. जनवरी और फरवरी महीने में अब तक 397 कैट बाइट के मामले सामने आ चुके हैं. कैट से संक्रमण बड़ी आसानी से एक इंसान से दूसरे इंसान तक फैल सकता है. कैट बाइट के बाद एंटी रेबीज के 4 डोज लगवाने पड़ते हैं.

बिल्ली की आवाजाही से फैल रही गंदगी
जानकारी के अनुसार ओपीडी परिसर में बिल्ली की लगातार आवाजाही से गंदगी फैल रही है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि एचआईवी संक्रमित मरीजों के वॉर्ड और मेडिसिन कक्ष तक बिल्लियों की पहुंच बनी हुई है. इससे दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों, विशेषकर नवजातों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है.

केंद्र सरकार द्वारा एचआईवी संक्रमित मरीजों को हर महीने हजारों रुपए की निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन ओपीडी में गंदगी और जानवरों की मौजूदगी के कारण इन दवाओं के खराब होने की आशंका जताई जा रही है. विशेष रूप से नवजात एचआईवी संक्रमित बच्चों को दी जाने वाली आवश्यक दवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात सामने आई है.

प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
चौंकाने वाली बात यह भी है कि एआरटी के एकीकृत परामर्श केंद्र के कुछ कर्मचारी बिल्लियों की देखभाल करते पाए गए. इससे अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. इससे पहले भी हाउसकीपिंग व्यवस्था संभाल रही कंपनी बीवीजी पर लापरवाही को लेकर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा चुका है.

इस पूरे मामले पर महात्मा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर अरविंद घनघोरिया ने इसे गंभीर लापरवाही माना है. उन्होंने स्वीकार किया कि ओपीडी में बिल्ली के तीन बच्चे मिले हैं, जिनमें से दो को रेस्क्यू कर लिया गया है, जबकि तीसरे को हटाने के लिए पिंजरा लगाया गया है. उन्होंने कहा कि मरीजों के बीच बिल्लियों की मौजूदगी संक्रमण फैलने का कारण बन सकती है. साथ ही पेस्ट और एनिमल कंट्रोल का कार्य देख रही कंपनी बीवीजी के कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी.



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