ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने पत्नी को जिंदा जलाने के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हत्या की सजा को गैर इरादतन हत्या (धारा 304 भाग-2 आइपीसी) में बदल दिया है, जिससे आरोपी की उम्रकैद की सजा कम हो गई। हाईकोर्ट ने मरणासन्न बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) को विश्वसनीय माना, लेकिन यह भी पाया कि यह घटना अचानक हुए घरेलू विवाद का परिणाम थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्व नियोजित हत्या का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला। आरोपी ने आग बुझाने का प्रयास किया रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि आग लगाने के बाद आरोपी ने पानी डालकर उसे बुझाने की कोशिश की थी। इस तथ्य को हत्या के स्पष्ट इरादे को कमजोर करने वाला माना गया। यह घटना वर्ष 2017 में भिंड जिले के लरौल गांव में हुई थी। आरोपी रवि वाल्मीकि पर अपनी पत्नी सुषमा पर डीजल डालकर आग लगाने का आरोप था। निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी सुषमा का मरणासन्न बयान कार्यपालक दंडाधिकारी के समक्ष अस्पताल में दर्ज किया गया था, जिसमें उसने अपने पति पर आग लगाने का आरोप लगाया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। निचली अदालत ने साक्ष्यों और मरणासन्न बयान के आधार पर रवि को धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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