विजयवर्गीय ने सिंघार को औकात बताई फिर दुख जताया: अब कांग्रेस प्रदेश भर में जलाएगी मंत्री कैलाश का पुतला, 1 हजार से ज्यादा ब्लॉक में प्रदर्शन – Bhopal News

विजयवर्गीय ने सिंघार को औकात बताई फिर दुख जताया:  अब कांग्रेस प्रदेश भर में जलाएगी मंत्री कैलाश का पुतला, 1 हजार से ज्यादा ब्लॉक में प्रदर्शन – Bhopal News




संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष को औकात बताने वाले बयान के विरोध में कांग्रेस प्रदेश व्यापी प्रदर्शन करने जा रही है। आज दोपहर 12 बजे भोपाल सहित पूरे प्रदेश के एक हजार ब्लॉक में कांग्रेस के कार्यकर्ता मंत्री विजयवर्गीय का पुतला दहन करेंगे। अदाणी का नाम लेने पर मंत्री ने जताई आपत्ति विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन गुरुवार सिंगरोली में अडाणी की कंपनी को कोल ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच तीखी बहस हो गई। इसी दौरान संसदीय कार्यमंत्री विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष से कह दिया औकात में रहो। चर्चा के दौरान सिंघार ने सरकार और अदाणी के बीच समझौते का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति जताई और कहा कि जो व्यक्ति सदन में मौजूद नहीं है, उसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस परंपरा का पालन करने के निर्देश दिए। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष गलत जानकारी दे रहे हैं। इस पर उमंग सिंघार ने कहा कि वह हर बात प्रमाण के साथ करते हैं और जरूरत पड़ने पर प्रमाण दे सकते हैं। दोनों नेताओं के बीच बहस तेज होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक भी खड़े हो गए। सदन में कुछ समय तक हंगामा होता रहा और कार्यवाही प्रभावित हुई। विधानसभा अध्यक्ष बोले- दोनों पक्षों को गुस्सा आ गया, यह अच्छा नहीं 40 मिनट के अंतराल के बाद सदन की दोबारा कार्यवाही शुरू हुई तो प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज दिन कुछ गरम-गरम सा है। तोमर ने कहा कि सदन के संचालन के लिए नियम और परंपरा का पालन जरूरी है। आज दुर्भाग्य से थोड़ी सी असहज स्थिति बन गई है। मध्य प्रदेश विधानसभा की गौरवशाली परंपरा रही है, सदन का गौरव लगातार बढ़ता रहे, इस बात का प्रयत्न सभी पक्षों के सदस्यों को करना चाहिए। तोमर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा कहते थे कि सदन में बात करते समय गुस्सा दिखना चाहिए, लेकिन गुस्सा आना नहीं चाहिए। लेकिन आज दोनों पक्षों को गुस्सा आ गया है, यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों मजबूत पहिए हैं। सभी से आग्रह करूंगा कि इस विषय का यही पटाक्षेप करें। मंत्री विजयवर्गीय बोले- अपने व्यवहार से अप्रसन्न, उमंग को प्यार करता हूं संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुझे करीब 37 साल का राजनीतिक अनुभव है। आज मैं खुद अपने व्यवहार से प्रसन्न नहीं हूं। जो जवाबदार पद पर बैठते हैं, चाहे विधानसभा अध्यक्ष हों, चाहे मुख्यमंत्री हों, चाहे नेता प्रतिपक्ष हों, अगर वे संसदीय मर्यादाओं का पालन नहीं करेंगे तो बाकी सदस्य कैसे करेंगे। आज पता नहीं कैसे हो गया, नेता प्रतिपक्ष ने मेरी ओर हाथों से इशारा किया, उमंग की बॉडी लैंग्वेज थोड़ा सा अलग थी, मैं उमंग को प्यार करता हूं। मैं अपने व्यवहार से दुखी हूं। इस पर हेमंत कटारे ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री को खेद व्यक्त करना चाहिए। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने कहा कि अब कोई आगे ऐसा ना करे, इस बात का ध्यान रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने दुख व्यक्त किया है, यह पर्याप्त है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने पर्याप्त बातें कह दी हैं, लेकिन अगर कुछ ऐसा है तो वह अपनी ओर से सबसे माफी मांग लेते हैं। सीएम ने कहा- मैं माफी मांगता हूं सीएम मोहन यादव ने मामले का पटाक्षेप करने का प्रयास करते हुए विजयवर्गीय के वक्तव्य पर कहा- जाने- अनजाने में कोई शब्द निकले हैं तो उसके लिए मैं माफी मांगता हूं। इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा मुख्यमंत्री ने जो भाव दिखाया, मैं उसका सम्मान करता हूं। मैं भी चार बार का विधायक हूं, संसदीय शब्दावली का ध्यान रखने की कोशिश करता हूं। मैं कभी अहम में नहीं आता। अगर मेरी ओर से कुछ हुआ है तो मैं भी खेद व्यक्त करता हूं। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने पक्ष और विपक्ष दोनों का आभार प्रकट किया और नेता प्रतिपक्ष को राज्यपाल के अभिभाषण पर वक्तव्य देने के लिए कहा। अध्यक्ष की नसीहत, मंत्री का खेद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा-गुस्सा दिखना चाहिए, आना नहीं चाहिए। विवाद बढ़ने पर विजयवर्गीय ने कहा कि वे अपने व्यवहार से प्रसन्न नहीं हैं और दुख व्यक्त किया। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने इसे पर्याप्त बताया, लेकिन कांग्रेस ने स्पष्ट माफी की मांग रखी। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा- जाने-अनजाने में कोई शब्द निकले हों तो मैं माफी मांगता हूं। इसके बाद उमंग सिंघार ने भी खेद जताया और सदन की स्थिति सामान्य हुई। मुख्यमंत्री ने माफी मांगी तो क्या हो गया यार- विजयवर्गीय विवाद थमा जरूर, लेकिन बयानबाजी जारी रही। मीडिया से बात करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, कई बार हो जाता है यार। यह बहुत सामान्य सी बात है। जो वह कह रहे हैं तो उनका एक अपना अंदाज है यार। कभी-कभी गुस्सा आ जाता है यार। मुख्यमंत्री की माफी पर उन्होंने कहा, कप्तान हैं मुख्यमंत्री… मुख्यमंत्री ने माफी मांगी तो क्या हो गया यार। विजयवर्गीय उम्रदराज, अब पहलवानी नहीं करनी चाहिए- सिंघार उधर, उमंग सिंघार ने पलटवार करते हुए कहा कि विजयवर्गीय उम्रदराज हो चुके हैं, उन्हें अब पहलवानी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा- जब अदाणी की हो रही थी तो मिर्ची क्यों लग रही थी। सदन में जो मुद्दा उठाया गया, वह तथ्यों के आधार पर था। बिना प्रमाण के कोई बात नहीं करता हूं। सिंघार ने आरोप लगाया कि असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है। भागीरथपुरा मामले में हुई मृत्यु और सिस्टम की कथित विफलताओं पर चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन उसे डाइवर्ट करने का प्रयास किया गया। जब कोई वरिष्ठ मंत्री इस प्रकार की भाषा का उपयोग करते हैं, तो उनकी मानसिक स्थिति और राजनीतिक सोच का अंदाजा लगाया जा सकता है।



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