इंसानी शरीर और डिजिटल डिवाइस कई मामलों में एक जैसे हैं। जिस तरह डिजिटल डिवाइस हैंग या लैक (फंस-फंस कर चलना) होने पर उसे रिसेट किया जाता है। इसी प्रकार हमारे शरीर में जब विकार या टॉक्सिसिटी बढ़ जाती है तो पंचकर्म की जरूरत पड़ती है। यह बॉडी को पूरी तरह स
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यह बातें AIIMS दिल्ली के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार ने कहीं। वे भोपाल स्थित पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान में 19, 20 और 21 फरवरी तक आयोजित हुई एडवांस्ड पंचकर्म थैरेप्यूटिक पंचकर्म कार्यशाला में भाग लेने आए थे।
संस्थान के प्राचार्य डॉ. उमेश शुक्ला ने बताया कि कार्यशाला में भोपाल सहित मध्य प्रदेश के 56 से जगहों से आए लगभग 150 आयुर्वेद विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य पंचकर्म की आधुनिक और उन्नत चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी देना, शोध आधारित प्रशिक्षण प्रदान करना तथा चयनित रोगियों को फ्री परामर्श देकर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना था।
पंचकर्म केवल उपचार नहीं बल्कि शरीर शुद्धि की प्रक्रिया है। इसमें पहले रोगी की जांच की जाती है, फिर शरीर को तैयार किया जाता है। उसके बाद शोध प्रक्रिया की जाती है। विद्यार्थियों को पंचकर्म की प्रामाणिक और वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षण देना है।
पंचकर्मा इंसानी शरीर का मैनुअल
AIIMS दिल्ली के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार ने यह भी कहा कि जिस तरह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (टीवी, मोबाइल या कम्प्यूटर) का एक मैनुअल होता है। उसी तरह इंसानी शरीर का एक मैनुअल है, जिसे आयुर्वेद कहा जाता है। पंचकर्म ऐसी प्रक्रिया है जो ना केवल रोगियों को रोग से मुक्त करती है।
बल्कि जिन मरीजों को वर्तमान में कोई रोग नहीं है, उनमें भविष्य में रोग के खतरे को भी कम करती है। पंचकर्म में सिरोधारा से लेकर कई प्रकार की थेरेपी और डाइट का एक संयुक्त प्लान होता है। जिसे मरीजों को फॉलो करना होता है। हर व्यक्ति के अनुसार यह तैयार की जाती है।
पंचकर्म तकनीक का प्रशिक्षण देते विशेषज्ञ।
पहले दिन 52 रोगियों को निःशुल्क परामर्श
19 फरवरी को तिरुवनंतपुरम से आए डॉ. पी मुरली कृष्ण ने ऑटिज्म, माइग्रेन, ग्रहणी रोग और सोरायसिस से पीड़ित 25 रोगियों को निःशुल्क परामर्श दिया। नागपुर से आए डॉ. सचिन चंडालिया ने तंत्रिका और स्पाइन से जुड़ी बीमारियां, संधिवात, गठिया वात, त्वचा रोग और दमा से पीड़ित 27 चयनित रोगियों का परामर्श कर पंचकर्म चिकित्सा का लाभ दिया।
दूसरे दिन जीवनशैली से जुड़ी बिमारियों और मालिश पर चर्चा
20 फरवरी को दिल्ली से डॉ. संतोष कुमार भटेड़ ने मोटापा, कोलेस्ट्रोल और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को पंचकर्म तकनीक से कैसे ठीक कर सकते है, इसके बारे में बताया।
वर्धा से आई डॉ. पूनम सावरकर ने कमर दर्द, मधुमेह और लकवा जैसे रोगों पर चर्चा की। उन्होंने पंचकर्म में विभिन्न प्रकार की मालिश तकनीकों जैसे रिफ्लेक्सोलॉजी, डिटॉक्स मसाज और अन्य विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
तीसरे दिन शोध आधारित चर्चा और प्रशिक्षण
AIIMS दिल्ली के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार ने पित्त से ग्रसित लोगों के लिए विरेचन प्रक्रिया पर शोध आधारित व्याख्यान दिया। इसमें पित को अलग अलग औषाधि से मल के रास्ते बाहर निकाला जाता है।
जयपुर से आए प्रोफेसर गोपेश मंगल ने बताया कि पंचकर्म शरीर की आंतरिक सफाई की प्रक्रिया है। हम शरीर को बाहर से रोज साफ करते हैं, लेकिन अंदर की सफाई नहीं करते। पंचकर्म इसी आंतरिक शुद्धि का माध्यम है।
पंचकर्म की प्रक्रिया कैसे होती है
पंचकर्म करने के लिए सबसे पहले रोगी की पाचन शक्ति को बढ़ाया जाता है और घी पिलाकर शरीर को तैयार किया जाता है। इसके बाद वोमेटिंग, लूज मोशन, बस्ति, नाक में दवा या तेल डालने जैसी प्रक्रियाएं रोग के अनुसार कराई जाती हैं।

ऑडिटोरियम में लाइव प्रसारण की सहायता से ट्रेनिंग लेते स्टूडेंट्स और प्रोफेसर।
विद्यार्थियों को ऑडियो और वीडियो में मिला प्रशिक्षण
पंचकर्म विभाग की HOD डॉ. कामिनी सोनी ने बताया कि एक्सपर्ट एक वार्ड में पंचकर्म तकनीक मरीजों पर करते थे जिसका लाइव प्रसारण तीनों दिन ऑडिटोरियम में ऑडियो और विजुअल माध्यम से अन्य विद्यार्थियों को दिखाया है। विशेषज्ञों को अलग अलग विषय दिए गए थे, जिन पर उन्होंने विस्तार से प्रशिक्षण दिया।
प्रत्येक आयु वर्ग के लिए अलग पंचकर्म तकनीक
विशेषज्ञों ने बताया कि पंचकर्म जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक किया जा सकता है, लेकिन हर आयु और रोग के अनुसार इसकी विधि अलग होती है। यह पूरी तरह हर्बल और सुरक्षित प्रक्रिया है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कमर दर्द, न्यूरो मस्कुलर विकार और अन्य जीवनशैली रोगों में पंचकर्म लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
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