भोपाल के आदमपुर छावनी में डंप कचरे की प्रोसेसिंग से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के लिए कचरा प्रबंधन की नई जवाबदेही तय कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अब कचरे की प्रोसेसिंग नहीं होने को सिर्फ प्रशासनिक गलती नहीं माना जाएगा, बल्कि संबंधित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अफसरों पर भी कार्रवाई होगी। इसमें राज्य शासन से लेकर कलेक्टर और नगर निगम सबको जिम्मेदार माना गया है। अब तक यह सिर्फ नगर निगम की जिम्मेदारी मानी जाती थी। यह गाइडलाइन इस साल 1 अप्रैल से लागू होने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (एसडब्ल्यूएम) रुल्स -2026 के संदर्भ में जारी की गई है। कोर्ट ने कहा है कि नए नियमों में सबकी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय हैं। है। सबको अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। साथ ही स्कूल के सिलेबस में भी कचरा प्रबंधन को शामिल किया जाना चाहिए। अब सिर्फ निगम नहीं, राज्य शासन से लेकर कलेक्टर तक सब जिम्मेदार जुर्माना लगाने से लेकर अफसरों पर अभियोजन तक 3 स्तरों पर कार्रवाई
नियमों का उल्लंघन करने पर स्थानीय निकाय और अन्य कचरा उत्पादकों पर जुर्माने से आपराधिक केस तक का प्रावधान रहेगा। पहली बार में जुर्माना, लगातार उल्लंघन पर आपराधिक मामला दर्ज होगा। निगरानी में लापरवाही पर अफसरों पर अभियोजन कार्रवाई होगी। लेगेसी वेस्ट पर टाइम-बाउंड प्लान और कचरे का 4 स्तरों पर सेग्रीगेशन
नए नियमों के तहत गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष श्रेणी चार तरह से कचरा अलग करने की व्यवस्था जरूरी होगी। इसके साथ ही पुराने डंप साइट्स खत्म करने के लिए समयबद्ध एक्शन प्लान बनाना होगा। देरी होने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना लगेगा। हर बल्क वेस्ट जनरेटर को बनाना होगा 31 मार्च तक प्रोसेसिंग सिस्टम
होटल, मैरिज गार्डन, बड़े अपार्टमेंट और संस्थानों जैसे बल्क वेस्ट जनरेटर को 31 मार्च तक या तो ऑन-साइट प्रोसेसिंग की व्यवस्था करना होगी या फिर प्रोसेसिंग का सर्टिफिकेट लेना होगा। ऐसा न होने पर बिना नोटिस सीधे पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगेगी। आदमपुर छावनी के टेंडर को दो सप्ताह में फाइनल करें… भोपाल के संदर्भ में कोर्ट ने बहुत स्पष्ट लिखा है कि नगर निगम अधिवक्ता ने बताया है कि आदमपुर छावनी के लिगेसी वेस्ट के निपटान को लेकर औपचारिकताएं शेष हैं, इसलिए टेंडर को अंतिम रूप देने में कुछ और समय लगेगा। उनकी मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
आदमपुर छावनी में डंप है 6 लाख टन लेगेसी वेस्ट टेंडर हों, प्लांट चालू हो जाएं, तो भी कम से कम 2 साल लगेंगे मनोज जोशी/अनूप दुबे की रिपोर्ट शहर की आदमपुर खंती में रोज 850 टन कचरा पहुंच रहा है। इसमें से 550 टन सूखा और गीला कचरा बिना प्रोसेस हुए डंप हो रहा है। यानी कचरे का पहाड़ बढ़ता ही जा रहा है। करीब 6 लाख टन से ज्यादा लिगेसी वेस्ट (पुराना कचरा) इकट्ठा हो चुका है। इसके डिस्पोजल के लिए तमाम कोशिशें हो रही हैं। टेंडर निकालकर कंपनियां बुलाई गई हैं। रोज आने वाले सूखे कचरे के निपटान के लिए टोरीफाइड चारकोल प्लांट तैयार है। गीले कचरे के लिए बायो-सीएनजी प्लांट अगस्त तक शुरू होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ये सारी चीजें मुकम्मल हो जाती हैं, तब भी इतने कचरे को खत्म होने में कम से कम दो साल लगेंगे। सबसे बड़ी चुनौती… हर दिन आने वाला 850 टन कचरा रोज 500 टन सूखा व 350 टन गीला कचरा आदमपुर आता है। सूखे के लिए 400 टन/दिन क्षमता वाला टोरीफाइड चारकोल प्लांट तैयार है, पर शुरुआत 200 टन से होगी। गीले कचरे के लिए 400 टन क्षमता का बायो-सीएनजी प्लांट अगस्त तक शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन पर्यावरण मंजूरी लंबित है। तब तक 350 टन गीला कचरा रोज डंप होता रहेगा। ऐसे में सबसे पहले रोज आने वाले कचरे की 100% प्रोसेसिंग की व्यवस्था बनानी होगी।
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