खरगोन के ऐतिहासिक नवग्रह मेले में आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या में 80–90 के दशक की सुपर स्टार अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री ने अपने मोहक कथक नृत्य से ऐसा समापन बांधा कि पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा. करीब तीन दशक बाद मंच पर वापसी कर रहीं मीनाक्षी की यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए अविस्मरणीय बन गई. नवग्रह मेले से उन्होंने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत शास्त्रीय नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ की. इस अवसर पर पूर्व मंत्री खरगोन विधायक बालकृष्ण पाटीदार सहित हजारों लोग मौजूद थे.
मीनाक्षी ने अपने पारिवारिक संस्कारों को याद करते हुए कहा कि उनका जन्म ऐसे परिवार में हुआ. जहां संगीत, नृत्य, अभिनय, शास्त्रीय ज्ञान और संस्कृत का वातावरण था. उनकी मां ही उनकी पहली गुरु रहीं, जिनसे उन्होंने भरतनाट्यम की विधिवत शिक्षा ली. उन्होंने बताया कि दिल्ली में 12वीं कक्षा के दौरान मजाक-मजाक में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया और आश्चर्यजनक रूप से मिस इंडिया चुनी गईं, जिसके बाद फिल्मी सफर शुरू हुआ और पीछे मुड़कर देखने की जरूरत ही नहीं पड़ी.
अपने करियर मंत्र पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पिता उन्हें ‘सक्सेस का एबीसी’ सिखाते थे. ए मतलब एबिलिटी यानी योग्यता, बी मतलब ब्रेक यानी सही समय पर मिलने वाला अवसर, और सी मतलब करेज यानी आत्मविश्वास और साहस. उनके पूरे सफर में ये तीनों बातें मार्गदर्शक रहीं.
80–90 के दशक में उन्होंने हिंदी के साथ-साथ तमिल और तेलुगू भाषाओं में करीब 80 से 90 फिल्मों में अभिनय किया. शादी के बाद वे अमेरिका चली गईं, लेकिन अब 30 साल बाद भविष्य को लेकर फिर से नई उम्मीद और ऊर्जा के साथ वापसी कर रही हैं.
फिल्म दामिनी को याद करते हुए मीनाक्षी शेषाद्री ने कहा कि फिल्म में उठाया गया मुद्दा आज भी उतना ही प्रासंगिक है. महिलाओं के खिलाफ होने वाले अन्याय का दमन जरूरी है और महिलाओं को साहस के साथ आगे आना चाहिए, क्योंकि भारत शक्ति की उपासना की भूमि है.
मीनाक्षी को पसंद हैं ऐसे किरदार
अश्लीलता पर अपनी राय रखते हुए मीनाक्षी ने साफ कहा कि उन्हें ऐसे किरदार पसंद हैं, जिन्हें परिवार के साथ बैठकर देखा जा सके. शॉर्टकट से सफलता पर उन्होंने कहा कि आज के दौर में शॉर्टकट से धन तो मिल सकता है, लेकिन सच्ची सफलता सत्य और मेहनत के रास्ते से ही आती है. सोशल मीडिया के युग में बदलाव तेज है और इसी कारण कई बड़ी फिल्में भी नहीं चल पा रही हैं.