Milk Production Increasing Tips in Summer: गर्मी का मौसम शुरू होते ही मुर्रा भैंस पालने वाले किसानों की चिंता बढ़ जाती है. देश की सबसे ज्यादा दूध देने वाली नस्लों में गिनी जाने वाली मुर्रा भैंस आमतौर पर 15 से 25 लीटर या उससे ज्यादा दूध देती है, लेकिन तेज गर्मी और लू का असर इस पर जल्दी पड़ता है. अगर सही देखभाल न हो तो दूध अचानक कम हो सकता है और सीधा नुकसान जेब पर पड़ता है.
गर्मी में क्यों घट जाता है दूध?
सीधी जिला पशु चिकित्सालय में पदस्थ पशु चिकित्सक डॉ. सलिल कुमार पाठक बताते हैं कि तापमान बढ़ते ही भैंस की भूख कम हो जाती है. जब वह कम खाएगी तो दूध भी कम देगी. इसलिए गर्मी में खानपान और पानी की व्यवस्था सबसे ज्यादा जरूरी हो जाती है.
डॉ. पाठक के अनुसार मुर्रा भैंस को इस मौसम में ज्यादा से ज्यादा हरा और रसदार चारा देना चाहिए. ज्वार, मक्का, बाजरा और नेपियर घास जैसे चारे शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते और पाचन भी सही रखते हैं.
सूखा चारा कम दें, दाना संतुलित रखें
गर्मी में ज्यादा भूसा या सूखा चारा देने से कब्ज और अपच की समस्या हो सकती है. अगर भूसा देना ही है तो उस पर थोड़ा पानी छिड़ककर खिलाएं, ताकि धूल न उड़े.
दूध देने वाली भैंसों के लिए संतुलित दाना बहुत जरूरी है. आम तौर पर हर 2 से 2.5 लीटर दूध पर 1 किलो संतुलित दाना देना चाहिए. दाने में प्रोटीन, ऊर्जा, खनिज और विटामिन भरपूर हों. मिनरल मिक्सचर और नमक मिलाने से कैल्शियम-फॉस्फोरस की कमी नहीं होती और प्रजनन क्षमता भी ठीक रहती है.
पानी की कमी न होने दें, इलेक्ट्रोलाइट जरूर दें
गर्मी में एक वयस्क मुर्रा भैंस 60 से 80 लीटर तक पानी पी सकती है. इसलिए दिन में कम से कम 3 से 4 बार साफ और ठंडा पानी जरूर उपलब्ध कराएं. सप्ताह में 2 से 3 बार पानी में इलेक्ट्रोलाइट पाउडर मिलाकर देने से डिहाइड्रेशन और लू का खतरा कम हो जाता है.
धूप से बचाव है बेहद जरूरी
पशु चिकित्सालय के उपसंचालक डॉ. जितेंद्र कुमार गुप्ता की सलाह है कि भैंसों को दोपहर की तेज धूप से बचाएं. शेड, पंखा या फॉगर्स की व्यवस्था करें. सुबह और शाम के समय चारा खिलाना ज्यादा फायदेमंद रहता है.
पशुपालक संतोष मिश्रा भी बताते हैं कि सुबह 6 से 8 बजे और शाम 6 से 7 बजे भूसा देना बेहतर रहता है. सही देखभाल, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी से गर्मी में भी दूध उत्पादन स्थिर रखा जा सकता है और मुनाफा बरकरार रखा जा सकता है.