गलत सिलेबस का पेपर मिला, परीक्षा प्रभावित: ग्वालियर के स्कूल में छात्रों का भविष्य अधर में, परिजनों का हंगामा – Gwalior News

गलत सिलेबस का पेपर मिला, परीक्षा प्रभावित:  ग्वालियर के स्कूल में छात्रों का भविष्य अधर में, परिजनों का हंगामा – Gwalior News




ग्वालियर के डॉन बॉस्को पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को पांचवीं और आठवीं बोर्ड कक्षा के छात्रों और उनके अभिभावकों ने हंगामा किया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया, जिसके कारण छात्रों को अंग्रेजी की परीक्षा में गलत सिलेबस का प्रश्नपत्र मिला। इससे उनकी परीक्षा प्रभावित हुई और साल बर्बाद होने की आशंका जताई जा रही है। घटना वायुनगर स्थित सनराइज पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल में हुई, जहां डॉन बॉस्को स्कूल के छात्रों का परीक्षा केंद्र था। शुक्रवार दोपहर 2 बजे जब छात्र अंग्रेजी की परीक्षा देने पहुंचे, तो उन्हें पहले एमपी बोर्ड इंग्लिश मीडियम का सामान्य प्रश्नपत्र दिया गया। कुछ देर बाद वह प्रश्नपत्र वापस ले लिया गया और एनसीईआरटी सिलेबस का अंग्रेजी पेपर दिया गया, जो छात्रों को पढ़ाए गए पाठ्यक्रम से भिन्न था। इस अचानक बदलाव से छात्र घबरा गए और उन्होंने परीक्षा नियंत्रक से आपत्ति दर्ज कराई। छात्रों ने बताया कि उन्हें पूरे साल एमपी बोर्ड का सामान्य सिलेबस पढ़ाया गया था। हालांकि, परीक्षा फॉर्म भरते समय स्कूल प्रबंधन ने इंग्लिश मीडियम के साथ एनसीईआरटी सिलेबस का विकल्प चुन लिया था। छात्रों के अनुसार, परीक्षा के अंतिम 15 मिनट में उन्हें फिर से एमपी बोर्ड का प्रश्नपत्र दिया गया, जिससे वे ठीक से उत्तर नहीं लिख पाए। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अतिरिक्त उत्तर पुस्तिकाएं नहीं दी गईं। परीक्षा के बाद बच्चे रोते हुए स्कूल पहुंचे और अभिभावकों को पूरी घटना बताई। इसके बाद अभिभावक स्कूल में जमा हो गए। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि प्राचार्य ने समस्या का समाधान करने के बजाय यह कह दिया कि सभी बच्चों को पास कर दिया जाएगा। इस बयान से अभिभावकों में और अधिक नाराजगी फैल गई, क्योंकि उनका मानना है कि मेहनती और कमजोर छात्रों को समान अंक देना उचित नहीं है। कुछ अभिभावकों ने आगामी परीक्षाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को इंटरनेट से एनसीईआरटी सिलेबस पढ़कर अगली परीक्षा देने की सलाह दी है। इस मामले में जब प्राचार्य से बात करने का प्रयास किया गया, तो वे मुंह ढंककर निकल गईं। उप-प्राचार्य ने भी इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।



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