राहुल मेहरा
नरसिंहपुर. जिले में सीएम हेल्पलाइन की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल उठा है, जहां एक रिटायर्ड अधिकारी के नाम पर शिकायत को बिना जांच के बंद कर दिया गया. यह मामला केरपानी ग्राम पंचायत से जुड़ा है, जहां 14 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता ब्रजेश कहार ने लाखों रुपये के बिलों में अनियमितता की शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप था कि शमशान घाट की फेंसिंग, स्टेशनरी और अन्य कार्यों के लिए सभी बिल एक ही जीएसटी नंबर वाली फर्म से पास किए जा रहे हैं, जो बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है. शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग की, लेकिन महज पांच दिनों में 19 जनवरी को इसे ‘स्पेशल क्लोज’ कर दिया गया.
हैरानी की बात यह है कि जांच और निराकरण का श्रेय हेमराज साहू को दिया गया, जो 31 दिसंबर 2025 को ही रिटायर हो चुके थे. साहू ने खुद स्पष्ट किया कि रिटायरमेंट के बाद उन्होंने कोई सरकारी काम नहीं किया. इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सीएम हेल्पलाइन की पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता को चुनौती दी है. शिकायतकर्ता का कहना है कि बिना मौके पर जांच या दस्तावेज चेक किए रिपोर्ट तैयार कर ली गई, जो सिस्टम में गहरी खामी दर्शाती है. जनपद पंचायत करेली के सीईओ राधेश्याम बरीबे ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है और कहा कि यदि गड़बड़ी पाई गई तो दोषियों पर कार्रवाई होगी. यह घटना एमपी में सीएम हेल्पलाइन की प्रभावशीलता पर बहस छेड़ रही है, जहां पहले भी झूठी क्लोजिंग के मामले सामने आए हैं.
भ्रष्टाचार और पंचायत स्तर पर फंड्स का दुरुपयोग
इस कांड ने नरसिंहपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर किया है, जहां ग्राम पंचायत स्तर पर फंडों का दुरुपयोग आम हो गया है. शिकायतकर्ता ब्रजेश कहार, जो स्थानीय निवासी हैं, ने बताया कि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन को इसलिए चुना क्योंकि यह आम आदमी की आवाज सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का माध्यम है. लेकिन इस मामले में प्रक्रिया का दुरुपयोग हुआ, जो हेल्पलाइन की मूल भावना को चोट पहुंचाता है. साहू के रिटायरमेंट के बाद उनके नाम पर निराकरण दर्ज होना सिस्टम की तकनीकी खामी या जानबूझकर की गई चूक को दर्शाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल में ऐसे फीचर्स हैं जहां पुराने अधिकारियों के नाम से एंट्री संभव हो जाती है, यदि आईडी निष्क्रिय न की गई हो.
पहले भी विवाद आए थे सामने, झूठी शिकायतों का भी खेल
नरसिंहपुर जिले में पहले भी सीएम हेल्पलाइन से जुड़े विवाद हुए हैं, जैसे पुलिस द्वारा शिकायतकर्ता को धमकाकर शिकायत वापस करवाना. इस बार मामला और गंभीर है क्योंकि यह पंचायत फंडों से जुड़ा है, जहां लाखों रुपये का खेल हो सकता है. सीईओ बरीबे ने जांच समिति गठित करने की बात कही है, लेकिन शिकायतकर्ता को आशंका है कि यह भी कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगी. एमपी सरकार ने हाल ही में झूठी शिकायतों पर एक्शन की घोषणा की है, लेकिन असली समस्या फर्जी निराकरण की है. यह घटना राज्य स्तर पर हेल्पलाइन की ऑडिट की जरूरत बताती है, ताकि आम जनता का विश्वास बना रहे.
बिना जांच के क्लोजिंग ने संदेह बढ़ाया
नरसिंहपुर के केरपानी ग्राम पंचायत में अनियमितता की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर क्रमांक के साथ दर्ज हुई, जहां एक ही फर्म से सभी बिल पास करने का आरोप है. जांच की बजाय स्पेशल क्लोजिंग ने संदेह बढ़ाया. साहू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं, जो फर्जी एंट्री की पुष्टि करता है. ब्रजेश कहार ने बिना जांच के क्लोजिंग को धोखा बताया. उन्होंने जनपद कार्यालय में कई बार दौरा किया, लेकिन जवाब नहीं मिला. स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसे मामले ग्रामीण भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं. प्रशासन ने जांच शुरू की है, लेकिन शिकायतकर्ता को न्याय की उम्मीद है. यदि गड़बड़ी साबित हुई, तो यह बड़ा स्कैंडल बन सकता है. एमपी में ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सिस्टम मजबूत करने की जरूरत है.