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Agriculture News: मध्य प्रदेश में अरहर की फसल इस समय दाना भरने की अवस्था में पहुंच चुकी है. यह चरण पैदावार तय करने वाला होता है, इसलिए सही पोषण और देखभाल बेहद जरूरी है. किसान यदि इस समय संतुलित उर्वरक और बेहतर प्रबंधन अपनाएं, तो प्रति एकड़ रिकॉर्ड उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
सीधी के वरिष्ठ कृषि अधिकारी संजय सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि अरहर दानों की चमक और वजन बढ़ाने में पोटाश और सल्फर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. पोटाश दानों को सुडौल बनाता है और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है जबकि सल्फर दानों में प्रोटीन और तेल की गुणवत्ता सुधारता है.
संजय सिंह ने कहा कि यदि बुवाई के समय इन पोषक तत्वों का प्रयोग नहीं हुआ है, तो दाना बनने की अवस्था में तरल उर्वरकों का छिड़काव काफी लाभकारी रहता है. इससे पौधे को तुरंत पोषण मिलता है और दानों का विकास बेहतर होता है.
संजय सिंह के अनुसार, दाना बनते समय खेत में नमी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है. मिट्टी में दरारें पड़ने या नमी की कमी से दाने पिचके रह जाते हैं. किसान जलभराव से बचते हुए हल्की सिंचाई जरूर करें ताकि पोषक तत्व जड़ों से दानों तक सही ढंग से पहुंच सकें.
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उन्होंने सलाह दी कि फलियों में दाना बनते ही एनपीके 0:52:34 एक किलो प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. इसमें मौजूद फास्फोरस दानों को मजबूती देता है और पोटेशियम चमक बढ़ाता है. इससे उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा सकती है.
संजय सिंह के मुताबिक, दाने फटने से बचाने और उन्हें आकर्षक बनाने के लिए 20 प्रतिशत बोरॉन 250 ग्राम प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करना चाहिए. इससे परागण बेहतर होता है और फलियों में दाने पूरे वजन के साथ विकसित होते हैं, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिलती है.
इस अवस्था में फली छेदक कीट बड़ा खतरा बन सकता है. इल्लियों से बचाव के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट या स्पिनोसैड का समय पर छिड़काव जरूरी है. जैविक विकल्प के रूप में समुद्री शैवाल अर्क या अमीनो एसिड आधारित टॉनिक का प्रयोग भी फायदेमंद रहता है.
अधिक उत्पादन के लिए सही समय पर कटाई भी अहम है. जब 80 प्रतिशत फलियां भूरी हो जाएं, तभी कटाई करें. फसल को खलिहान में अच्छी तरह सुखाएं लेकिन तेज धूप में ज्यादा देर न रखें. उचित भंडारण से दानों की चमक और वजन बाजार तक सुरक्षित रहता है.