उमरिया में शहडोल वन मंडल के जयसिंहनगर परिक्षेत्र में दो बाघों की लड़ाई में घायल हुए 8 साल के नर बाघ को इलाज के बाद रविवार को फिर से जंगल में छोड़ा गया। बाघ अब पूरी तरह स्वस्थ पाया गया है। दरअलस 29 जनवरी को बाघ के कमर में चोट लग गई थी। जिससे इसे चलने- फिरने में दिक्कत हो रही थी। सूचना मिलने पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) की टीम ने हाथियों की मदद से बाघ रेस्क्यू किया था। 20 दिन चला इलाज, इंक्लोजर में रखी निगरानी रेस्क्यू के बाद बाघ को बीटीआर के मगधी परिक्षेत्र स्थित विशेष बाड़े (इंक्लोजर) में रखा गया, जहां पशु चिकित्सकों की टीम ने अधिकारियों की निगरानी में उसका इलाज किया। करीब 20 दिनों तक चले इलाज और निगरानी के बाद बाघ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। संयुक्त टीम करेगी जंगल में रिलीज रविवार को बीटीआर और शहडोल वन मंडल की टीम ने मिलकर बाघ को उसके मूल क्षेत्र में छोड़ा। क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि बाघ फिट है और रिलीज के बाद भी उसकी लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।
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