तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में राजस्थान से आए एक परिवार की महिला श्रद्वालु का पर्स चोरी हो गया। पर्स में गहने, नकदी और महंगे मोबाइल थे, जो कि चोरी हुए हैं। पुलिस को सूचना दी गई और सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए तो मंदिर के मुख्य गेट का कैमरा ही बंद मिला। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर लिखने तक से मना कर दिया। खास बात यह है कि, मामले में कार्रवाई के लिए फरियादी महिला के एडवोकेट भाई को कानूनी मदद लेना पड़ गई। दरअसल, यूपी के रहने वाले एडवोकेट और उनके राजस्थान निवासी बहन-जीजा एक कार से ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग के दर्शन करने पहुंचे। परिवार के मुताबिक, उन्होंने 20 फरवरी को उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन किए। भस्म आरती में शामिल होने के बाद वह ओंकारेश्वर के लिए निकले थे। यहां दोपहर 2 बजे पहुंच गए। ओंकारेश्वर दर्शन के लिए प्रोटोकॉल दर्शन की व्यवस्था नहीं हो पाई। इतनी दूर से आए थे, दर्शन करना थे इसलिए परिवार की दो महिलाएं मंदिर चली गई। कार में रखा था पर्स, कोई चुराकर ले गया राजस्थान के सीकर जिला निवासी अविनाश जांगिड़ ने बताया कि वह पेशे से बिजनेसमैन है। परिवार के साथ दर्शन के लिए ओंकारेश्वर आए थे। भीड़ के चलते सिर्फ महिलाएं मंदिर पहुंची। मेरी पत्नी ने पर्स को कार में रख दिया था। हम जीजा-साले नर्मदा तट पर चले गए थे। हमें पता नहीं था कि वह पर्स को कार में छोड़कर गई है, वरना हम उसे सुरक्षित कर लेते। महिलाएं दर्शन के बाद लौटी और उन्होंने देखा कि कार में पर्स नहीं है। किसी ने कार का गेट खोला और पर्स चोरी करके ले गया। दो लाख रूपए के गहने थे, कैमरे बंद मिले फरियादी के अनुसार, पर्स में सोने की चार अंगूठी, एक चैन, एक मंगलसूत्र और चांदी की पायल थी। साथ ही 17 हजार रूपए नकदी थे। ज्वैलरी की कीमत ही करीब दो लाख रूपए की है। इनके अलावा एक आईफोन और मोटोरोला कंपनी का मोबाइल था। ब्रह्मपुरी पार्किंग स्थल पर कार खड़ी थी। वहां कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं थे। ठीक सामने मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक कैमरा लगा था, वह भी बंद मिला। शाम तक थाने में बैठे रहे, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने कहा कि चोरी की एफआईआर नहीं लिखते है। परिचित मजिस्ट्रेट को फोन किया, तब एफआईआर की महिला श्रद्वालु के अनुसार, ओंकारेश्वर दर्शन के लिए उनके साथ उनके भाई-भाभी भी आए थे। भाई अधिवक्ता है। उनके एक परिचित खंडवा में मजिस्ट्रेट है। पुलिस के बर्ताव को लेकर उन्होंने मजिस्ट्रेट से शिकायत की, तब जाकर थाना मांधाता पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने हमसे कहा कि, यहां तो रोजाना चोरी की वारदातें होती है। इसलिए बड़े अधिकारियों ने निर्देश दें रखे है कि चोरी के मामलों में एफआईआर नहीं करना है।
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