नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में नाबालिग बच्चे पंचर बनाने में इस्तेमाल होने वाले सॉल्यूशन का नशा कर रहे हैं। यह नशा पेरेंट्स और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। यह चरस, गांजा या शराब नहीं, बल्कि एक ऐसा रसायन है जो बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है। शहर के कई इलाकों में छोटे बच्चे साइकिल पंचर की दुकानों से सॉल्यूशन ट्यूब खरीद रहे हैं। इन ट्यूबों से निकलने वाले रसायन को वे कपड़े या रुमाल पर डालकर घंटों सूंघते रहते हैं। यह नशा सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, और इसकी बिक्री पर कोई ठोस रोक नहीं है। नशे से बच्चों में शारीरिक मानसिक समस्याएं पुलिस विभाग भी मानता है कि इस लत की चपेट में आए बच्चों में शारीरिक और मानसिक समस्याएं सामने आ रही हैं। लगातार सेवन से भूख कम होना, शरीर का कमजोर पड़ना, चक्कर आना, उलझन, आंखों पर बुरा असर और व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। डॉक्टर बोले-नशे से बच्चों की याददाश्त क्षमता कम नरसिंहपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मनीष मिश्रा के अनुसार, सॉल्यूशन (जैसे गोंद, व्हाइटनर, थिनर या डेनड्राइट) का नशा बच्चों के मस्तिष्क पर सीधा असर डालता है। इससे याददाश्त, सीखने की क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति प्रभावित होती है। लंबे समय तक सेवन से अवसाद, चिड़चिड़ापन और मानसिक असंतुलन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। एसडीओपी बोले- बच्चों की इलाज सुनिश्चित किए जाएंगे गाडरवारा थाना के एसडीओपी ललित सिंह डागुर ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ बच्चे पंचर दुकानों से सॉल्यूशन लेकर सूंघ रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले में एक विशेष टीम गठित कर रही है। बच्चों की काउंसलिंग, लत छुड़ाने और उनके विकास पर ध्यान देने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है, और जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।
Source link