पहले पढ़ाई, फिर गन्ने के रस से भरी कड़ाही, 14 साल का लड़का बना रहा देसी गुड़, एमपी से यूपी तक डिमांड

पहले पढ़ाई, फिर गन्ने के रस से भरी कड़ाही, 14 साल का लड़का बना रहा देसी गुड़, एमपी से यूपी तक डिमांड


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Success Story: छतरपुर में छोटे से गांव के भूपेंद्र प्रजापति की कहानी गजब है. उम्र तो 14 साल की है, लेकिन हुनर ऐसा कि वह खुद अपने हाथों से देसी गुड़ बनाता है. साथ ही स्कूल की पढ़ाई भी करता है. भूपेंद्र के हाथ का गुड़ इतना मीठा कि डिमांड दूर-दूर तक है. जानें कहानी…

Chhatarpur News: छतरपुर के एक मेहनती लड़के की कहानी प्रेरणा से कम नहीं है. 14 साल की उम्र में गजब का हुनर और जिम्मेदारी. यह लड़का खुद अपने हाथों से देसी गुड़ बनाता है. साथ ही स्कूल में पढ़ाई भी करता है. छतरपुर के लवकुश नगर से लगभग 16 किमी दूर चितहरी और पठा गांव जहां सालों से गन्ना किसान गुड़़ बनाने का काम कर रहे हैं. यहां गुड़ बनाने में  सिर्फ बुजुर्ग, युवा ही पारंगत नहीं, बल्कि बच्चे भी आगे हैं. यहां बच्चे भी परंपरागत तरीके से गुड़ बनाते हैं. यही वजह है कि यहां का गुड़ मध्य प्रदेश के बाहर भी बिकने जाता है.

जिले के छोटे से गांव पठा के रहने वाले भूपेंद्र प्रजापति का कहना है कि मेरे पिताजी पारंपरिक विधि से गुड़ बनाने का काम करते थे तो उनके साथ मैं भी काम में हाथ बंटाने लगा. इसके बाद धीरे-धीरे गुड़ बनाना सीख गया. भूपेंद्र ने बताया, पापा किसान हैं. सालों से गन्ने की खेती करते हैं. पापा 10 साल से पुराने देसी तरीके से ही गुड़ बनाते आ रहे हैं. पुराने तरीके से गुड़ बनाने का सबसे बड़ा फायदा ये कि इसका स्वाद दूसरे गुड़ से बहुत अलग होता है. स्वाद की वजह से यहां के गुड़ की ज्यादा मांग रहती है.

2 साल से बना रहे गुड़ 
भूपेंद्र ने बताया, मैं भी पापा के साथ गुड़ बनाने के काम में लग गया. धीरे-धीरे मुझे भी गुड़ बनाना आने लगा. अब तो मुझे गुड़ बनाने का पूरा प्रोसेस पता है. 2 साल से गुड़ बना रहा हूं. हालांकि, मैं पढ़ाई भी करता हूं. स्कूल की पढ़ाई से जब फ्री हो जाता हूं, तब गुड़ बनाने लगता हूं.

ऐसे बनता है देसी गुड़ 
भूपेंद्र ने बताया, गुड़ बनाने के लिए पहले गन्ने से सीरा निकालते हैं. इसके बाद लोहे की कढ़ाई में रस डालते हैं. लगभग 3 घंटे बाद इसे आग की आंच से उतार लिया जाता है. इसके बाद सीरा जब ठंडा हो जाता है तब इसे 5 किलो की बाटी में डाल दिया जाता है. लगभग 25 मिनट बाद यह जम जाता है.

इन मंडियों में जाता बिकने 
भूपेंद्र ने आगे बताया, यहां का गुड़ आसपास की मंडियों में जाता है. महोबा मंडी से लेकर पन्ना और छतरपुर की मंडी तक बिकने जाता है. इसके अलावा जो खरीददार यहां लेने आ जाते हैं तो उनको यहीं दे देते हैं.

मंडी में ये भाव 
भूपेंद्र के पिता बताते हैं कि हमारे यहां से यूपी की महोबा मंडी ही नजदीक है, इसलिए हमारे यहां का गुड़ अधिकतर महोबा मंडी में ही जाता है. यहां हमें गुड़ का भाव 35 से 40 रुपए किलो मिल जाता है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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