मैच की सुबह अभिषेक और गंभीर ने किया ‘सीक्रेट सेशन’, काली कार में निकला कारवां

मैच की सुबह अभिषेक और गंभीर ने किया ‘सीक्रेट सेशन’, काली कार में निकला कारवां


नई दिल्ली. मैच का दिन हो तो ज्यादातर खिलाड़ी मेंटली अपने को तैयार करते है पर अभिषेक शर्मा और हेड कोच ने रविवार की सुबह अलग ही मन बना लिया था. ब्रेक फॉस्ट के बाद एक काली एसयूवी टीम इंडिया के होटल आईटीसी नर्मदा के रिस्पेशन पर आती है और 7 मिनट के बाद इसमें गंभीर और अभिषेक एक साथ बैठ कर कही बाहर जाने के लिए निकलते है. ये हर कोई जानता है कि अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले से पहले पूरा फोकस सिर्फ अभिषेक शर्मा पर है. लगातार तीन बार शून्य पर आउट होना किसी भी आक्रामक ओपनर के लिए मानसिक रूप से भारी पड़ सकता है, खासकर जब टीम सुपर 8 चरण की ओर बढ़ रही हो. हम सब इंसान हैं और असफलता का असर मन पर पड़ना स्वाभाविक है.

यही वह समय होता है जब आत्म-संदेह सिर उठाने लगता है. खिलाड़ी खुद से सवाल करने लगता है, ज्यादा सोचने लगता है और खेल से पहले ही दबाव महसूस करने लगता है. सोशल मीडिया इस स्थिति को और कठिन बना देता है, क्योंकि वहां नकारात्मकता को ज्यादा मंच मिलता है. लोग हमेशा आलोचना के लिए तैयार रहते हैं और सकारात्मक बातों से ज्यादा नकारात्मक टिप्पणियां नजर आती हैं.

गंभीर और अभिषेक पहुंचे इंडोर नेट्स पर 

मौजूदा समय में अभिषेक शर्मा के लिए गौतम गंभीर सबसे सही मार्गदर्शक साबित हो सकते हैं. बतौर हेड कोच और एक ऐसे वरिष्ठ खिलाड़ी के रूप में, जिन्होंने अभिषेक के करियर के उभार में अहम भूमिका निभाई है, गंभीर ऐसे व्यक्ति हैं जिन पर अभिषेक भरोसा करते हैं. इसीलिए मैच के दिन सुबह 9.15 पर अभिषेक और गंंभीर  मोदी स्टेडियम पहुंच गए जहां लोकल गेंदबाज पहले से उनका इंतजार कर रहे थे. ये नेट्स 15-15 मिनट के 3 सेशन में चला जहां अभिषेक को रिब लाइन गेंदबाजी, लोकल ऑफ स्पिनर ने राउंड दि विकेट गेंदबाजी की गई. इस नेट सेशन में गंभीर जिस शिद्दत के साथ अभिषेक के साथ काम कर रहे थो वो उनका अनुभव है जो बताता है कि वह इस परिस्थिति में अकेले नहीं हैं और बड़े से बड़े खिलाड़ी भी ऐसे दौर से गुजर चुके हैं.

गंभीर की मिलती जुलती कहानी 

ऐसे समय में अभिषेक को सबसे ज्यादा जरूरत गौतम गंभीर की है. गौतम गंभीर खुद 2014 आईपीएल के दौरान, जब वह कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान थे, इसी तरह के खराब दौर से गुजरे थे. उनके अपने शब्दों में, वह उनके करियर के सबसे कठिन समयों में से एक था और इससे वह असुरक्षित महसूस करने लगे थे.उन्होंने कहा था, “जब मैं लगातार तीन बार शून्य पर आउट हुआ, तब मुझे दबाव महसूस हुआ. मैंने अपनी क्षमता पर शक करना शुरू कर दिया. 2007 के वर्ल्ड टी20 फाइनल या 2011 में मुझे दबाव महसूस नहीं हुआ, क्योंकि तब मेरे पास रन थे. लेकिन 2014 में स्थिति अलग थी. लोग मेरी फॉर्म पर बात कर रहे थे और मैं शुरुआती गेंदों पर ही आउट हो रहा था.”

गंभीर ने एक इंटरव्यू में  बताया था कि उन्होंने उस समय मनीष पांडे को ऊपर बल्लेबाजी के लिए भेजा और खुद तीसरे नंबर पर चले गए, क्योंकि मनीष अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे. लेकिन उस मैच में मनीष शून्य पर आउट हुए और गंभीर एक रन बनाकर आउट हो गए. तब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ. उन्होंने खुद से वादा किया कि वह कभी भी खुद को बचाने के लिए किसी साथी खिलाड़ी को आगे नहीं भेजेंगे. अगले मैच में वह फिर ओपनिंग करने उतरे, पहली ही गेंद पर चौका लगाया और पचास रन बनाए. वहीं से उनका आत्मविश्वास लौटा, लगातार अर्धशतक आए और टीम ने आईपीएल खिताब भी जीता.

.खुद पर रखो भरोसा गंभीर का गुरु मंत्र

अभिषेक को अब सिर्फ खुद पर भरोसा रखने और समझदारी से खेलने की जरूरत है. अगर कुछ गेंदें डॉट खेलनी पड़ें तो भी कोई हर्ज नहीं. अगर इसका मतलब यह है कि ईशान को पहले स्ट्राइक लेने दें, तो भी ठीक है. खेल अहंकार का नहीं, धैर्य और संतुलन का होता है. वह बहुत प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और लंबे समय तक असफल नहीं रह सकते. ड्रेसिंग रूम में गौतम गंभीर जैसा अनुभवी मार्गदर्शक होने से उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा और पूरी संभावना है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ इस मुकाबले में वह जोरदार वापसी करें.



Source link