राहुल मेहरा
नरसिंहपुर. जिले के आमगांव बड़ा में हाल ही में तीन वर्ष पहले लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ नवीन शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक स्कूल भवन अब जर्जर हालत में पहुंच गया है, जिसने पूरे इलाके में सुरक्षा और सरकारी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बाहर से भव्य दिखने वाला यह संरचना अंदर से बेहद घटिया गुणवत्ता के कारण अब खतरनाक साबित हो रही है. दीवारों में गहरी दरारें, बरसात में छत से पानी का टपकना, फर्श की उखड़ती टाइल्स और जर्जर टॉयलेट जैसी समस्याएं छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का बड़ा विषय बन चुकी हैं.
स्थानीय अभिभावकों और छात्रों का कहना है कि नई बिल्डिंग मिलने की खुशी अब डर में बदल चुकी है. बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता करने वाले माता-पिता मानते हैं कि इतनी कम अवधि में भवन की यह स्थिति न केवल ठेकेदार की लापरवाही को उजागर करती है बल्कि सरकारी निर्माण मानकों की गुणवत्ता और निरीक्षण तंत्र की विफलता को भी सामने लाती है. आमगांव बड़ा के इस मामले से प्रदेश भर में सरकारी स्कूलों के अवसंरचना की स्थिति पर पुनः सवाल उठने लगे हैं, जहां लाखों बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है और जिन शिक्षण स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, वही आज स्थिति भयावह बनी हुई है.
कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया
निर्माण के समय सरकारी नियमों के तहत आमतौर पर 5 साल की गारंटी लागू होती है, लेकिन तीन साल के अंदर ही दीवारों पर क्रैक, छत से पानी का रिसाव और टूटी टाइल्स जैसे गंभीर दोष दिखना स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी का कारण है. प्रिंसिपल संजीव कुमार पांडे और वरिष्ठ शिक्षक राजकुमार ठाकुर ने बताया कि इमारत की यह खराब स्थिति पहले भी कई बार उच्च अधिकारियों के ध्यान में लाई गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. छात्रों का कहना है कि बारिश के समय क्लासरूम गर्म वातावरण से भरे रहते हैं और पानी टपकने के कारण पढ़ाई पर भी प्रभाव पड़ता है. जो शासकीय ढांचा अपेक्षित सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना चाहिए था, वह आज बच्चों के लिए जोखिम का बड़ा कारण बन चुका है, जैसा कि कानपुर में भी जर्जर स्कूल इमारतों के कारण छात्रों को खतरे का सामना करना पड़ा है, जहां छत टपकने से बारिश के दौरान परीक्षा में बैठ रहे छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा था.
नरसिंहपुर के स्कूल भवन की हालत को ऐसे भी जान लें
| समस्या | विवरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| दीवारों में दरारें | गहरी क्रैक, गिरने का खतरा | भवन ढहने की आशंका |
| छत से पानी टपकना | बरसात में क्लासरूम गीला | पढ़ाई बाधित, स्वास्थ्य जोखिम |
| टाइल्स उखड़ना | फर्श खराब और फिसलन | चोट का खतरा |
| टॉयलेट जर्जर | लेडीज टॉयलेट बंद | छात्राओं की असुविधा |
| आईसीटी लैब | कंप्यूटर पन्नी से ढके | डिजिटल शिक्षा प्रभावित |
| पेयजल लाइन | सीपेज से गंदा पानी | स्वास्थ्य खतरा |
दीवारों में दरारें, बच्चों का भविष्य और सुरक्षा दोनों खतरे में
स्कूल के अंदर के हालात देखकर कोई भी हैरान रह जाता है. दीवारें क्रैक हो चुकी हैं और बरसात के मौसम में पानी छत से टपकता है जिससे फर्श गीला हो जाता है. कई क्लासरूम की दीवारें गिरने की कगार पर हैं, और इससे बच्चों की सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडरा रहा है. बरसात के समय कंप्यूटर लैब में रखे उपकरणों को पन्नी से ढकना पड़ता है ताकि पानी से नुकसान न हो. पेयजल पाईप में सीपेज के कारण पानी गंदा हो जाता है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम बन रहा है. प्रिंसिपल और वरिष्ठ अध्यापकों का कहना है कि पहले भी उन्होंने इस बारे में शिकायत की थी, लेकिन मरम्मत और निरीक्षण में देरी के कारण समस्या जटिल होती जा रही है. कई अभिभावकों का कहना है कि उन्हें डर लगता है कि बच्चों का भविष्य और सुरक्षा दोनों खतरे में हैं.
लेडीज टीचर का टायलेट बंद करना पड़ा
प्रिंसिपल संजीव कुमार पांडे ने बताया कि भवन की दीवारें और छत का रिसाव इनकी प्राथमिक चिंता है. भगवान के नाम पर बन रही भवन में इस प्रकार की कमी निंदनीय है. शिक्षक राजकुमार ठाकुर का कहना है कि लेडीज़ टीचर के टॉयलेट की खराब हालत के कारण सुरक्षा और संसाधन की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. छात्रों ने भी कह दिया कि भवन मिलने के समय खुशी थी, लेकिन अब डर लगा रहता है कि यह सुरक्षित नहीं है.
5 साल की गारंटी के बावजूद मरम्मत क्यों नहीं
कार्यपालन अधिकारी अभिषेक ठाकुर ने स्कूल भवन पर हुई खराबी के बारे में बताया कि विभाग जांच कर उचित कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा कि यह जांच गुणवत्ता मानकों और निर्माण सामग्री की जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ठेकेदार की जिम्मेदारी और निरीक्षण प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जाएंगे. लेकिन 5 साल की गारंटी के बावजूद मरम्मत क्यों नहीं हुई, यह बड़ा मुद्दा है. स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि क्या विभाग और ठेकेदार के बीच मिलीभगत के कारण निर्माण गुणवत्ता पर समझौता किया गया था. ऐसे ही सवाल मध्य प्रदेश के अन्य जिलों के स्कूलों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठते रहे हैं, जहां हाल ही में बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन पानी टपकने जैसी घटनाएं सामने आई हैं.